नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद अपनी पहली महाराष्ट्र यात्रा पर पहुंचे भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई ने राज्य प्रशासन की ओर से तय प्रोटोकॉल के पालन न किए जाने पर नाराजगी जताई। दरअसल, जस्टिस बीआर गवई के मुंबई आगमन पर न तो राज्य के मुख्य सचिव, न पुलिस महानिदेशक और न ही मुंबई पुलिस आयुक्त ने अगवानी की। यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है, जिसे लेकर सीजेआई ने असंतोष व्यक्त किया।
पता हो कि जस्टिस गवई 14 मई को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले चुके हैं। वे महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में भाग लेने के लिए मुंबई आए थे। जस्टिस गवई, जो महाराष्ट्र से संबंध रखते हैं, देश के दूसरे दलित सीजेआई हैं, उनसे पहले यह जिम्मेदारी न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन ने निभाई थी।
चैत्यभूमि पहुंचने पर दिखी प्रशासनिक सक्रियता, मौजूद रहे शीर्ष अधिकारी
सीजेआई गवई द्वारा प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर नाराजगी जताए जाने के कुछ ही घंटों बाद स्थिति में बदलाव नजर आया। जब वे दादर स्थित चैत्यभूमि पहुंचे, जहां उन्होंने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहां राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त मौजूद थे। यह वही तीन शीर्ष अधिकारी थे जो सीजेआई के मुंबई आगमन के समय अनुपस्थित रहे थे।
“व्यवहार पर आत्ममंथन जरूरी”
रविवार को जस्टिस बीआर गवई बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एवं गोवा द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम उनके देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बनने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में सीजेआई ने प्रोटोकॉल की अनदेखी को लेकर सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से ऐसी छोटी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी संवैधानिक संस्था का प्रमुख पहली बार अपने ही गृह राज्य में आ रहा हो, तो राज्य के प्रशासन को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि उसका व्यवहार उचित और मर्यादित था या नहीं।
“संविधान सर्वोपरि है” – सीजेआई गवई
सम्मान समारोह में अपने संबोधन के दौरान सीजेआई बीआर गवई ने स्पष्ट कहा कि देश की सर्वोच्च सत्ता किसी एक संस्था या अंग में निहित नहीं है, बल्कि भारत का संविधान ही सर्वोपरि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका ये सभी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं और इन्हें मिलकर संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए। सीजेआई ने यह भी कहा कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि भारत केवल लोकतांत्रिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी निरंतर सशक्त और विकसित हो रहा है। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि संस्थाओं को अपने अधिकारों और मर्यादाओं के भीतर रहते हुए समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए।





