नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन के निधन के बाद उन्हें भारत रत्न देने की मांग जोर पकड़ रही है। कई राजनीतिक दलों ने इस मांग का समर्थन किया है। इसी बीच झारखंड के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने घोषणा की है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम में शिबू सोरेन की जीवनी को शामिल किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि “जो भी तकनीकी प्रक्रियाएं होंगी, सरकार उन्हें जरूर सुलझाएगी, चाहे इसके लिए NCERT जाना पड़े या अन्य किसी संस्थान से समन्वय करना पड़े। मेरा स्पष्ट विश्वास है कि दिशोम गुरु के जीवन और संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों को जाननी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि शिबू सोरेन ने करीब 50 साल पहले नेमरा गांव से संघर्ष की शुरुआत की और फिर जननायक की भूमिका में झारखंड को अलग राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाई। ऐसे नेता का जीवन बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत होना चाहिए।
विधानसभा में गूंजी ‘भारत रत्न’ की मांग
आज, शुक्रवार को झारखंड विधानसभा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठी। यह मांग कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव के दौरान रखी। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने समाज सुधार, आदिवासी और वंचित वर्गों के हक-हुकूक, और अलग राज्य के लिए आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रदीप यादव ने सदन से अपील की कि शिबू सोरेन को भारत रत्न देने के समर्थन में विधानसभा की ओर से एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया जाए, ताकि उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल सके।
शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग पर इन दलों का समर्थन
झारखंड विधानसभा में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग पर सदन में मौजूद कई सदस्यों ने मेज थपथपाकर अपना समर्थन जताया। जनता दल यूनाइटेड के विधायक सरयू राय ने शोक प्रस्ताव के दौरान कहा कि दिशोम गुरु के नाम से मशहूर शिबू सोरेन के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने भारत रत्न देने की मांग का खुलकर समर्थन किया। आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो ने भी सदन से आग्रह किया कि शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
वहीं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी, पारसनाथ की चोटी पर शिबू सोरेन और शीर्ष झारखंड आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। इससे पहले सदन के नेता, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने वक्तव्य में नशाबंदी, आदिवासी समाज के उत्थान और झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।





