नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और JMM नेता चंपाई सोरेन आज बीजेपी में शामिल हो गए। रांची में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली। इस दौरान असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और झारखंड BJP के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी मौजूद रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)के संस्थापक सदस्य रहे चंपाई सोरेन CM पद से हटाए जाने के बाद से ही पार्टी से नाराज चल रहे थे और दो दिन पहले उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी।
चंपाई को माना जाता है शिबू सोरेन का सहयोगी
चंपाई को JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन के करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। इनकी अनुसूचित जनजातियों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। JMM में इनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब हेमंत सोरेन जेल गए थे तब झारखंड की सत्ता इनको सौंपी गई थी। चंपाई सोरेन को अपने पाले में लाकर बीजेपी अनुसूचित जनजातियों में अपना आधार बढ़ाना चाहती है।
JMM ने बुधवार को छोड़ी थी पार्टी
गौरतलब है कि चंपाई सोरने ने बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कार्यशैली और उनकी नीतियों से मजबूर होकर मैने उस पार्टी को छोड़ दिया जहां मैने वर्षों तक सेवा की थी।
चंपाई के आने से बीजेपी को क्या होगा फायदा ?
चंपाई सोरेन को कोल्हान टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। चंपाई वर्तमान में शिबू सोरेन के बाद JMM के सबसे वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं। इसलिए हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपाई को सूबे की सत्ता चलाने के लिए दी गई थी। हालांकि जब हेमंत सोरेन जेल से रिहा हुए तब उन्होंने 4 जुलाई को चंपाई सोरेन से सत्ता वापस ले ली और उन्हें शिक्षा मंत्री बना दिया। लेकिन ये बात चंपाई सोरेन को रास नहीं आई। उसके बाद ही पार्टी और चंपाई के बीच रिश्ते खराब होने लगे और कुछ दिनों के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
कितने ताकतवर हैं चंपाई ?
कोल्हान टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले चंपाई सोरेन झारखंड की सबसे प्रभावशाली जनजाति ‘संथाल’ से आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की कुल 3 करोड़ 29 लाख 88 हजार की आबादी में जनजातियों की भागीदारी 86 लाख 45 हजार है। इसमें अकेले संथाल जनजाति की आबादी 27 लाख 54 हजार है। बिहार से झारखंड को अलग करने के लिए चलाए गए आंदोलन में चंपाई सोरेन ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसलिए जनजातियों के बीच उनकी गहरी पैठ मानी जाति है।




