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Monday, March 2, 2026
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सरकारी वकीलों की चांदी, केंद्र ने खोला खजाना, क्या अब अदालतों में और मजबूत होगा सरकार का पक्ष?

केंद्र सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाकर अधिकतम ₹21,600 प्रतिदिन कर दी है, जो फरवरी 2026 से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट सहित अन्य केसों में लागू होगी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने सरकारी वकीलों की अलग-अलग श्रेणियों की फीस में बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। नए नोटिफिकेशन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, ट्रिब्यूनल और आर्बिट्रेशन केस में पैरवी करने वाले सरकारी वकीलों की फीस बढ़ा दी गई है। ये संशोधित दरें 1 फरवरी, 2026 से लागू हो गई हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी, 2026 से पहले किए गए काम और पेशियों के लिए पुरानी दरें लागू रहेंगी, जबकि नई फीस केवल 1 फरवरी या उसके बाद किए गए कार्यों पर ही लागू होगी। नोटिफिकेशन में अलग-अलग कोर्ट और केस श्रेणी के अनुसार फीस की स्पष्ट सूची दी गई है, ताकि सरकारी वकील अपने पारिश्रमिक की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकीलों की नई फीस (टेबल-ए)

केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार का पक्ष रखने वाले सरकारी वकीलों की फीस अब ग्रुप ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ वकीलों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में तय की गई है।

सुनवाई: सभी नियमित अपीलों और बचाव पक्ष द्वारा दायर रिट याचिकाओं (अंतिम सुनवाई) के लिए, ग्रुप ‘ए’ वकीलों को 21,600 रुपये प्रति मामला प्रति दिन, जबकि ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ वकीलों को 14,400 रुपये मिलेंगे।

प्रवेश संबंधी मामले: बचाव पक्ष द्वारा दायर प्रवेश संबंधी मामलों (SLP और रिट याचिकाएं) के लिए, ग्रुप ‘ए’ के लिए 14,400 रुपये और ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ के लिए 7,200 रुपये निर्धारित हैं।

मसौदा तैयार करना: SLP, प्रतिवाद हलफनामे या प्रत्युत्तर तैयार करने का शुल्क ग्रुप ‘ए’ के लिए 14,400 रुपये, और ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ के लिए 7,200 रुपये है।

मुख्यालय के बाहर की सेवाएं: मुख्यालय के बाहर की सेवाओं के लिए दैनिक शुल्क सुनवाई शुल्क के बराबर है: 21,600 रुपये (ग्रुप ‘ए’) और 14,400 रुपये (ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’)।

यह बदलाव सरकारी वकीलों की मेहनत और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए किया गया है और फरवरी 2026 से लागू है।

हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल में सरकारी वकीलों की नई फीस (टेबल-बी)

केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल (बॉम्बे और कलकत्ता उच्च न्यायालय की प्रधान पीठों को छोड़कर) में सरकारी वकीलों की फीस में संशोधन किया गया है।

रिटेनरशिप: भारत के सभी उप-सॉलिसिटर जनरल, सीनियर CGSC और CGSC (दिल्ली हाईकोर्ट) को 14,400 रुपये मासिक रिटेनरशिप शुल्क मिलेगा।

सुनवाई: रिट याचिकाओं, अपीलों और मुकदमों में प्रभावी सुनवाई के लिए 14,400 रुपये प्रति मामला प्रति दिन निर्धारित हैं। अप्रभावी सुनवाई के लिए शुल्क 2,400 रुपये प्रति मामला है, और यह केवल पांच सुनवाई तक सीमित रहेगा।

मसौदा तैयार करना: अभिवेदनों और प्रति-शपथपत्रों का मसौदा तैयार करने के लिए प्रति अभिवेदन 4,800 रुपये का शुल्क तय किया गया है।

यह संशोधन फरवरी 2026 से लागू किया गया है और सरकारी वकीलों की मेहनत और समय के अनुसार उन्हें उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करता है।

बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट व डिस्ट्रिक्ट/सबऑर्डिनेट कोर्ट में सरकारी वकीलों की नई फीस (टेबल C, D & E)

टेबल ‘C’ – बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट की प्रधान पीठें:

मुकदमे और अपीलें: विशेष वकील – 14,400 रुपये प्रति सुनवाई, वरिष्ठ वकील समूह-I – 9,600 रुपये, समूह-II – 6,000 रुपये।

मसौदा तैयार करना: विशेष वकील – 6,000 रुपये, वरिष्ठ वकील समूह-I – 4,800 रुपये।

टेबल ‘D’ – डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट:

रिटेनरशिप: मासिक 9,600 रुपये (दिल्ली को छोड़कर)।

सुनवाई: प्रभावी सुनवाई – 2,880 रुपये प्रति मामला प्रति दिन, अप्रभावी सुनवाई – 960 रुपये।

मसौदा तैयार करना: लिखित बयान या अपील के आधारों का मसौदा तैयार करने पर प्रति याचिका 2,400 रुपये।

टेबल ‘E’ – आर्बिट्रेशन कोर्ट:

वरिष्ठ मध्यस्थता वकील: प्रभावी सुनवाई – 3,600 रुपये।

कनिष्ठ मध्यस्थता वकील: प्रभावी सुनवाई – 2,400 रुपये।

मसौदा तैयार करना: वरिष्ठ – 2,400 रुपये, कनिष्ठ – 1,200 रुपये।

ये बदलाव सरकारी वकीलों को उनके कार्य और सुनवाई के आधार पर उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करते हैं और फरवरी 2026 से लागू होंगे।

अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की नई फीस (फरवरी 2026 से लागू)

मासिक रिटेनरशिप शुल्क:

अटॉर्नी जनरल: ₹1,20,000

सॉलिसिटर जनरल: ₹96,000

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल: ₹72,000

प्रति मामले पेश होने पर देय शुल्क:

मुकदमे, रिट याचिकाएं, अपील और संदर्भ: ₹38,000 प्रति मामला प्रति दिन

विशेष अवकाश याचिकाएं और अन्य आवेदनों: ₹24,000 प्रति दिन

ये संशोधित दरें अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, अन्य न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में पेश होने वाले मामलों पर लागू होंगी।

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