नई दिल्ली/रफ्तार न्यूजः दिल्ली की कथित शराब घोटाला मामले में सीएम केजरीवाल के खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली की राउंड एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। सीएम केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग केस के मामले में ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था, इसके बाद 26 जून को सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में केजरीवाल को गिरफ्तार किया। ईडी और सीबीआई ने शराब घोटाले मामले की जांच पूरी कर ली है। सीबीआई ने कोर्ट की सुनवाई में बताया था कि केजरीवाल ने आबकारी नीति में फायदा उठाने के लिए मन मुताबिक बदलाव किए थे। केजरीवाल को ED के मामले में जमानत मिल चुकी है।
अरविंद केजरीवाल और AAP पर गंभीर आरोप
ईडी ने पहली बार किसी राजनीतिक दल, आम आदमी पार्टी (AAP) को मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया हैं। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी आरोपी बनाया गया है। यह चार्जशीट 200 पन्नों की है।
ED सूत्रों के मुताबिक चार्जशीट में मुख्य तौर पर क्या-क्या है ?
- ED के अनुसार, मनीष सिसोदिया और के.कविता के साथ अरविंद केजरीवाल भी इस घोटाले के मास्टरमाइंड हैं।
- ED ने आम आदमी पार्टी को भी आरोपी के रूप में नामित किया है।
- यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल को मनी लॉन्ड्रिंग जांच में आरोपी बनाया गया है।
- ईडी ने कहा है कि PMLA की धारा 70 के तहत आप कंपनी के रूप में मुकदमा चलाने के लिए उत्तरदायी है।
- ED का कहना है कि अपराध की आय का उपयोग आम आदमी पार्टी ने अपने गोवा चुनाव अभियान में किया था।
- AAP पार्टी ने गोवा चुनाव प्रचार में 45 करोड़ रुपये खर्च किए।
कुल आठ चार्जशीट
इस मामले मे ED ने कुल आठ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमे 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले हफ्ते, एजेंसी नें BRS नेता के.कविता और 4 अन्य के खिलाफ भी इसी तरह की चार्जशीट दायर की थी।
केजरीवाल को पहले भी बताया गया था मुख्य साजिशकर्ता
ED ने पहले भी केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले का किंगपिन और मुख्य साजिशकर्ता कहा था। आरोप है कि उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्रियों, AAP नेताओं और अन्य लोगों के साथ मिलकर काम किया।
शराब नीति और CBI जांच
दिल्ली शराब घोटाला मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की शराब नीति को तैयार करने और लागू करने में हुए कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के सक्सेना ने इस नीति में हुई अनियमिताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
CBI मे अरविंद केजरीवाल के बारे में क्या कहा?
CBI ने कहा, “दिल्ली में कोविड से मौतें हो रही थीं और शराब नीति तय करने की जल्दी हो रही थी. जब कोविड था तो दिल्ली पर किसका शासन था. मुख्यमंत्री का. एक दिन शराब नीति पर हस्ताक्षर हुए और उसी दिन ये अधिसूचित हो गई. साउथ लॉबी दिल्ली में बैठी हुई थी, ये देखने के लिए उसके सामने इस पर दस्तखत हो और ये नोटिफाई हो जाए.” CBI ने आरोप लगाया कि शराब नीति पर हस्ताक्षर और उसकी अधिसूचना एक ही दिन में कर दी गई। साथ ही, उन्होंने कहा कि साउथ लॉबी दिल्ली में मौजूद थी ताकि इस नीति पर जल्द से जल्द दस्तखत हो जाएं। CBI ने यह भी आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल उसे बदनाम कर रहे करने की कोशिश कर रहे हैं।
जब अदालत ने पूछा की अरविंद केजरीवाल को अब क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है। तो CBI ने कहा कि वे चुनाव के समय उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी।
क्या है कथित शराब घोटाला?
दिल्ली सरकार ने नवंबर 2021 में नई आबकारी नीति (2021-22) लागू की। इस नीति के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी कंपनियों के हाथ में चला गया। सरकार का कहना था कि इससे राजस्व बढ़ेगा, लेकिन यह नीति विवादों में घिर गई। विवाद बढ़ने पर सरकार ने जुलाई 2022 में नई नीति को रद्द कर दिया और पुरानी नीति फिर से लागू कर दी।
इस मामले की शुरुआत दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार की एक रिपोर्ट से हुई, जो उन्होंने उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, आर्थिक अपराध शाखा, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भेजी। यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2022 को भेजी गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि मनीष सिसोदिया, जो एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी थे, नई आबकारी नीति के जरिए बिना उप-राज्यपाल की मंजूरी के फर्जी तरीके से राजस्व कमाया। इसमें बताया गया कि शराब कंपनियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी गई थी।
कोरोना के समय शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस शुल्क माफी के लिए दिल्ली सरकार से संपर्क किया था। इसके बाद सरकार ने 28 दिसंबर से 27 जनवरी तक लाइसेंस शुल्क में 24.02 प्रतिशत की छूट दी, जिससे लाइसेंसधारियों को फायदा और सरकार को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अधिकारियों के अनुसार, नीति में किसी भी बदलाव के लिए आबकारी विभाग को पहले कैबिनेट और फिर उप-राज्यपाल से अनुमति लेनी होती है। बिना अनुमति के किया गया कोई भी बदलाव गैर-कानूनी माना जाएगा।
रिपोर्ट CBI को भेजी गई, जिसके आधार पर मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी शराब की कीमतों में बदलाव किया और प्रति बीयर 50 रुपये आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फायदा पहुंचाया।





