नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तराखंड के केदारनाथ में हुए हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद आर्यन कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। साथ ही, राज्य सरकार ने एक कमांड और कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाने का फैसला किया है। यह केंद्र हेलीकॉप्टर सेवा और यात्रियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान की जा सकेगी।
यूकाडा की सीईओ सोनिका ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी ने हेलीकॉप्टर दुर्घटना में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि हेलीकॉप्टर उड़ानों के बेहतर समन्वय के लिए कमांड एवं कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। केदारनाथ की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए भविष्य में सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।
आर्यन कंपनी पर लगे आरोप क्या हैं?
आर्यन कंपनी के खिलाफ दर्ज मामले में बताया गया है कि रविवार को मौसम खराब था, आसमान पर बादल और धुंध छाई हुई थी। इसके बावजूद कंपनी ने एसओपी (Standard Operating Procedure) का उल्लंघन करते हुए हेलीकॉप्टर उड़ाया, जो दुर्घटना का मुख्य कारण बना। मामले में कहा गया है कि कंपनी के मैनेजर इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि ऐसे खराब मौसम में हेलीकॉप्टर उड़ाना जानलेवा हो सकता है, फिर भी उन्होंने उड़ान भरी। इस लापरवाही को ही हादसे का कारण माना जा रहा है। इस दुर्घटना के लिए आर्यन कंपनी के मैनेजर विकास तोमर और एकाउंटेबल मैनेजर कौशिक पाठक को जिम्मेदार ठहराया गया है।
हेलीकॉप्टर निर्धारित समय से पहले उड़ान भर गया
FIR में कहा गया है कि हेलीकॉप्टर का पहला उड़ान स्लॉट सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच था, लेकिन हादसा सुबह 5:30 बजे हुआ। इसका मतलब है कि कंपनी ने निर्धारित एसओपी का पालन नहीं किया। इस वजह से कंपनी के अधिकारियों को इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
केदारनाथ हादसे में 7 लोगों ने गंवाई जान
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रविवार को एक हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था। इस हादसे में सात लोगों ने अपनी जान गंवा दी। हेलीकॉप्टर श्रद्धालुओं को लेकर केदारनाथ से लौट रहा था, जब रुद्रप्रयाग के पास गौरीकुंड के जंगलों में खराब दृश्यता के कारण यह हादसे का शिकार हो गया। हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग इस दुर्घटना में जान गंवा बैठे। बताया जा रहा है कि इस हादसे में उनके शव बुरी तरह जल गए थे।





