नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को CAG की रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में शराब नीति से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नई आबकारी नीति 2021-22 के कारण दिल्ली सरकार को 2,026.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सरकार पर रिपोर्ट छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संविधान के नियमों का उल्लंघन है।
CAG रिपोर्ट के बड़े खुलासे
CAG की रिपोर्ट में 2017-18 से 2020-21 तक की अवधि और नई आबकारी नीति 2021-22 की गहन जांच की गई। इसमें कई महत्वपूर्ण कमियां पाई गईं, जिनमें लाइसेंस देने की प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण और अवैध शराब बिक्री पर लगाम लगाने में विफलता शामिल है।
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, आप सरकार की शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2,002.68 करोड़ रुपये का भारी राजस्व घाटा हुआ। इस घाटे के कई कारण थे। गैर-अनुरूप वार्डों में खुदरा दुकानें न खोलने से 941.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सरेंडर किए गए लाइसेंसों को दोबारा टेंडर न कर पाने से 890 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। कोविड-19 का हवाला देते हुए आबकारी विभाग की सलाह के विरुद्ध क्षेत्रीय लाइसेंसधारियों को शुल्क में छूट देने से 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। क्षेत्रीय लाइसेंसधारियों से उचित सुरक्षा जमा राशि एकत्र न करने से 27 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
पिछली सरकार पर रिपोर्ट छिपाने का आरोप
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि नई शराब नीति के कारण बाजार में कुछ कंपनियों का एकाधिकार बढ़ा, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म होने लगी। इससे न केवल राजस्व में कमी आई, बल्कि शराब की अवैध बिक्री पर भी रोक नहीं लग पाई। CAG रिपोर्ट पेश करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि 2017-18 के बाद से कोई CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, “हमने कई बार राष्ट्रपति, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से रिपोर्ट पेश करने की मांग की थी, लेकिन इसे छिपाया गया। यह संविधान का उल्लंघन है। बीजेपी सरकार ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वे पहली विधानसभा सत्र में ही CAG रिपोर्ट पेश करेंगे। अब इस रिपोर्ट के आने के बाद दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो सकता है।यह रिपोर्ट दिल्ली की वित्तीय स्थिति और शराब नीति से जुड़े फैसलों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।




