नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । संतकबीर नगर में पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तारीफ कर सभी को चौंका दिया। अपने भाषण के दौरान बृजभूषण ने कहा कि अखिलेश यादव एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता, मुलायम सिंह यादव हनुमान जी के भक्त थे।
बृजभूषण सिंह ने कहा कि खुद अखिलेश यादव ने एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है और वे श्रीकृष्ण के वंशज माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि “धर्म के विरोधी अखिलेश जी नहीं हो सकते। जो कुछ वह धर्म के खिलाफ बोलते हैं, वह महज उनकी राजनीतिक मजबूरी है।” अपने बयान में उन्होंने आगे कहा, “शायद मुझे यह बात मंच से नहीं कहनी चाहिए थी, लेकिन चूंकि यहां विद्वान लोग मौजूद हैं, इसलिए यह सच अनायास मेरे मुंह से निकल गया।”
“कथा कहने का अधिकार सभी को है”, इटावा की घटना पर बोले बृजभूषण शरण सिंह
बृजभूषण शरण सिंह ने इटावा में कथावाचक के साथ हुई मारपीट की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कथा कहने या सुनाने का अधिकार किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, यह हर व्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा, “जो लोग पवित्रता या शुद्धता के नाम पर कथावाचकों की आलोचना करते हैं, उन्हें वेदव्यास और विदुर जैसे महान चरित्रों की जीवनी का अध्ययन करना चाहिए।”
हालांकि, बृजभूषण ने यह भी कहा कि किसी को भी किसी जाति विशेष का अपमान नहीं करना चाहिए। लेकिन जिस तरह इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “धर्म और जाति को राजनीति का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।”
अखिलेश यादव की धार्मिक भावना की तारीफ करते हुए उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति धार्मिक विषयों को लेकर बेहद गर्म है। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राम मंदिर, धार्मिक स्थलों और आयोजनों को लेकर वैचारिक टकराव जगजाहिर है। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह का मंच से अखिलेश यादव की सराहना करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
धर्म और राजनीति को लेकर केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी की बड़ी सीख
कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने समाज में बढ़ते जातिगत भेदभाव, सांप्रदायिक तनाव और ऊंच-नीच की मानसिकता पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने की आवश्यकता है, न कि उसे बांटने की। पंकज चौधरी ने इटावा में कथावाचकों पर हुए हमले की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं पर अनावश्यक राजनीति हो रही है, जो ठीक नहीं है।





