नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । शामली जनपद में उस समय माहौल गरमा गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतर आया। सोमवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और यह उनकी छवि धूमिल करने की सुनियोजित साजिश है।
ब्राह्मण समाज ने की ये मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष प्रेम शंकर कोठारी ने कहा कि देश की सनातन परंपरा में शंकराचार्य पद अत्यंत सम्मानित और पूजनीय माना जाता है। ऐसे में इस पद पर आसीन संत के खिलाफ बिना ठोस आधार के मुकदमा दर्ज होना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की भूमिका और पृष्ठभूमि की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
संतों के साथ असम्मानजनक व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण
ब्राह्मण नेता ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि देश में चार शंकराचार्य मठ स्थापित हैं, जो हिंदू धर्म की परंपरा और शास्त्र सम्मत व्यवस्था के प्रतीक हैं। ऐसे में किसी भी शंकराचार्य के सम्मान से जुड़ा मामला पूरे हिंदू समाज से जुड़ जाता है। उन्होंने हाल ही में आयोजित माघ मेला के दौरान कथित रूप से हुई घटना का भी जिक्र किया और कहा कि धार्मिक आयोजन में संतों के साथ असम्मानजनक व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
”FIR समाज राजनीतिक या वैचारिक विरोध से प्रेरित”
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि जब से शंकराचार्य ने गौ-हत्या जैसे मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखी है, तभी से उन्हें विवादों में घसीटने की कोशिशें तेज हो गई हैं। उनका कहना है कि वे एक गैर-राजनीतिक धार्मिक व्यक्तित्व हैं, जो केवल धर्म और समाजहित के मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को समाज राजनीतिक या वैचारिक विरोध से प्रेरित मान रहा है।
”आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा”
ब्राह्मण समाज ने सरकार से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, ताकि निष्पक्षता के साथ तथ्यों की पड़ताल हो सके। प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी गई कि यदि मामले में पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल
हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या सरकार SIT गठन की मांग पर विचार करती है या नहीं।





