नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । झारखंड में भारतीय जनता पार्टी एक व्यापक पदयात्रा की योजना बना रही है। पार्टी बांग्लादेशी घुसपैठ, जबरन धर्मांतरण और राज्य में आदिवासी आबादी में हो रही कमी जैसे मुद्दों को लेकर यह यात्रा आयोजित करेगी। बीजेपी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जनजागरण और सामाजिक चेतना फैलाना है। यह पदयात्रा तीन वर्षों तक चलेगी और इसे अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा।
इस यात्रा का नेतृत्व बीजेपी के वरिष्ठ नेता निशिकांत दुबे, चंपई सोरेन और बाबूलाल मरांडी जैसे दिग्गज नेता करेंगे। इसके अलावा, सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू भी इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे, जो हाल ही में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी में शामिल हुए थे।
हर सप्ताह तीन से चार दिन चलेगी पद यात्रा
सूत्रों के मुताबिक, यह पद यात्रा हर सप्ताह तीन से चार दिनों तक जारी रहेगी। यात्रा का उद्देश्य राज्य की प्रत्येक तहसील तक पहुँचना है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह अभियान तीन वर्षों तक चलेगा और झारखंड के हर इलाके को इसमें शामिल किया जाएगा।
तीन साल की अवधि क्यों रखी गई?
पार्टी का मानना है कि इस यात्रा के जरिए वह आने वाले तीन वर्षों में झारखंड की जनता, अपने कार्यकर्ताओं और संगठन के अन्य सदस्यों से सीधा जुड़ाव स्थापित कर सकेगी। इसी कारण इस अभियान की अवधि तीन साल तय की गई है। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि झारखंड में मिली चुनावी हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन में फैली निराशा को दूर कर उनमें नई ऊर्जा और उत्साह भरना भी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य है।
चुनाव से नहीं है कोई सीधा संबंध?
पार्टी का कहना है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव अभी चार साल से भी ज्यादा दूर हैं, इसलिए इस यात्रा का चुनाव से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। यह पद यात्रा मुख्य रूप से राज्य में हो रही अवैध घुसपैठ, जबरन धर्मांतरण और बांग्लादेशी घुसपैठ के चलते आदिवासी समुदाय के अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगी।





