नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । कर्नाटक के विजयपुरा से बसनगौड़ा पाटिल यतनल ने महात्मा गांधी को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हंगामा पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि गांधी भारत के राष्ट्रपिता नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं गाते और मातृभूमि को सलाम नहीं करते, वे पाकिस्तान चले जाएं। इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, वहीं भाजपा ने फिलहाल इस मामले में दूरी बनाए रखी है।
‘गांधी भारत के राष्ट्रपिता नहीं, पाकिस्तान के हैं’
विजयपुरा में एक सार्वजनिक सभा के दौरान बसनगौड़ा पाटिल यतनल ने विवादित बयान देते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं गाएंगे या मातृभूमि को सलाम नहीं करेंगे, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उनका कहना था कि “इस देश में रहना है तो वंदे मातरम कहना पड़ेगा, वरना गांधी को साथ लेकर पाकिस्तान चले जाओ।” यतनल ने महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्रपिता मानने से इनकार करते हुए कहा “हमारे लिए डॉ. अंबेडकर पर्याप्त हैं। गांधी भारत के राष्ट्रपिता नहीं हैं, वह पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं। हम उन्हें अपना राष्ट्रपिता नहीं मानते।” उन्होंने नेहरू को भी अपना पहला प्रधानमंत्री नहीं माना और दावा किया कि हमारे पहले प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस थे।
कर्नाटक के बसनगौड़ा पाटिल यतनल के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका यह बयान भारतीय इतिहास की स्थापित मान्यताओं को चुनौती देता है, क्योंकि महात्मा गांधी को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रपिता माना जाता है और जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे।
इतिहासकारों के अनुसार, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई और 1943 में सिंगापुर में खुद को ‘प्रधानमंत्री’ घोषित किया था, लेकिन तब भारत स्वतंत्र नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर राजनीतिक लाभ के लिए दिए जाते हैं और वे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
विपक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि यह बयान गांधी के योगदान का अपमान है। उन्होंने कहा कि गांधी ने पूरे देश को स्वतंत्रता दिलाई, जबकि पाकिस्तान का विभाजन ब्रिटिश नीतियों का परिणाम था। उन्होंने भाजपा पर भी सवाल उठाया कि ऐसे विधायकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। वहीं, ममता बनर्जी ने इस बयान को ‘विभाजनकारी राजनीति’ करार दिया।
BJP ने यतनल के बयान से बनाई दूरी
बीजेपी ने बसनगौड़ा पाटिल यतनल के विवादित बयान से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने स्पष्ट किया कि “यह विधायक का निजी विचार है, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हम गांधी और अंबेडकर दोनों का सम्मान करते हैं।” हालांकि, कुछ पार्टी नेताओं ने निजी तौर पर यतनल का समर्थन किया है, जिससे पार्टी में आंतरिक कलह की संभावना जताई जा रही है।
बता दें कि यतनल पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के करीबी माने जाते हैं और कई बार पार्टी लाइन से अलग बयान दे चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला कर्नाटक विधानसभा के आगामी सत्र में भी चर्चा का विषय बन सकता है, जहां विपक्ष भाजपा पर राजनीतिक हमला कर सकता है। यह देखना बाकी है कि यतनल पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं।





