नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा है, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया और अपनी काबिलियत से खास पहचान बनाई। 2018 में कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत दिलाकर बघेल ने पार्टी का वनवास खत्म किया और जनता का भरोसा जीता।
कांग्रेस के वनवास को किया खत्म
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी 2003 से सत्ता से बाहर थी. 2013 में हुए झीरम घाटी हमले ने पार्टी को और कमजोर कर दिया, जिसमें कई बड़े नेता मारे गए. ऐसे कठिन समय में 2014 में भूपेश बघेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने बिखरी हुई कांग्रेस को जोड़ने का काम किया और संगठन को फिर से खड़ा किया।
2018 में लिखी जीत की नई कहानी
भूपेश बघेल ने 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को शानदार जीत दिलाई. कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीतकर नया इतिहास रचा। इस जीत का श्रेय सबसे ज्यादा बघेल को मिला. इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, 2018 के चुनाव में बघेल ने तीन बड़ी चुनौतियों का सामना किया पाटन सीट पर अपने ही भतीजे विजय बघेल से मुकाबला। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूरे राज्य में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी। अजीत जोगी और बीएसपी गठबंधन से त्रिकोणीय मुकाबला था। लेकिन उन्होंने इन तीनों मोर्चों पर जीत दर्ज कराई और कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया। सीएम बनने के बाद भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के किसानों, मजदूरों और गरीबों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। गोधन न्याय योजना, नरवा-गरुवा-घुरुवा-बाड़ी योजना जैसी पहल ने उन्हें जनता से जोड़े रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गोधन न्याय योजना की सराहना की थी।
80 के दशक से शुरू हुई राजनीति
23 अगस्त 1961 को दुर्ग जिले की पाटन तहसील में किसान परिवार में जन्मे बघेल ने 80 के दशक में यूथ कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की. 1993 में पहली बार विधायक बने और धीरे-धीरे कांग्रेस में मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में पहचान बनाई।





