नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों के काफिले पर नक्सलियों ने बड़ा हमला किया है। हमले में 8 जवानों समेत एक ड्राइवर शहीद हो गए हैं। यहां के नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी घटना 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी। जिसमे CRPF के 75 और जिला बल के एक जवान शहीद हुए थे। बस्तर में वैसे तो हर साल मार्च से जून के बीच बड़ी नक्सल वारदातें होती है पर ताड़मेटला का जिक्र आते ही आज भी लोग सिहरते हुए दिखाई देते हैं।
6 अप्रैल को हुआ ताड़मेटला कांड
6 अप्रैल 2010 की तारीख छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक काली तारीख है। इस दिन नक्सलियों ने ताड़मेटला में एंबुश लगाकर सीआरपीएफ के 76 जवानों को अपना निशानों पर लिया था। उस दिन सीआरपीएफ के 120 जवान सर्चिंग के लिए निकले हुए थे। उनके वापस लौटने के रास्ते में एंबुश लगाकर बैठे 1000 से ज्यादा नक्सलियों ने ब्लास्ट करके जवानों पर हमला कर दिया, जवान संभल पाते इससे पहले ही नक्सलियों ने एंबुश के पीछे से अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। काफी देर तक चली इस मुठभेड़ में 76 जवान शहीद हुए थे और 8 नक्सली मारे गए थे। हमले के बाद नक्सलियों ने जवानों के हथियार और मिलिट्री शूज भी लूट लिए थे। यह मिलिट्री पर्संस पर हुआ देश का ये सबसे बड़ा नक्सली था।
इस नक्सली हमले में केंद्रीय मंत्री की गई जान
देश के किसी राजनीतिक दल के नेताओं पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला है। 25 मई 2013 का दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति के इतिहास का कभी न भूलने वाला दिन है। इस दिन नक्सली हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा और नंद कुमार पटेल समेत 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।इस हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की भी 17 दिनों तक मौत से जूझने के बाद मौत हो गई थी।
2013 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस के दिग्गज ने प्रदेशभर में परिवर्तन रैली निकाल रहे थे। 25 मई को नेताओं के काफिले को से होते हुए गुजरना था। ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि सड़क पर ही 10 फीट का गड्ढा हो गया। इसके बाद नक्सलियों ने काफिले पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले में महेंद्र कर्मा को मारने के बाद नक्सलियों ने उनकी लाश पर चढ़कर डांस भी किया था।
मई 2013 में जिस जगह कांग्रेस नेताओं पर हमला हुआ था उसी के पास 11 मार्च 2014 को नक्सलियों ने 15 जवानों को अपना निशाना बनाया था, इस हमले में एक ग्रामीण की भी मौत हो गई थी। इस दिन सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल के 44 जवान सर्चिंग पर निकले थे, पंद्रह जवान आगे चल रहे थे। एंबुश में बैठे करीब 250 नक्सलियों ने उन्हीं को निशाना बनाकर आईईडी ब्लास्ट कर दिया और उसके बाद उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 15 जवान शहीद हो गए और राह चलता एक ग्रामीण भी नक्सलियों की गोली का शिकार हुआ था।
बस्तर में फिर हुआ नक्सली हमला
इस दिन नक्सलियों ने पहला हमला करीब 11 बजे बीजापुर जिले के केतुलनार गांव के पास किया। उन्होंने मतदान कर्मियों को ले जा रही बस को बारूदी विस्फोट से उड़ाया। फिर गोलीबारी की। इससे 7 मतदान कर्मियों की भी मौत हो गई थी। बस के पीछे चल रहे पुलिसकर्मियों ने जवाबी गोलीबारी की। लेकिन नक्सली जंगल में जा छिपे। बस्तर लोकसभा क्षेत्र के बीजापुर जिले में 10 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। वोटिंग के बाद मतदान दल लौट रहे थे। हमले में 75 से 100 नक्सली शामिल थे।





