नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी आज अपना 98वां जन्मदिन मना रहे हैं। आडवाणी का जीवन भारतीय राजनीति की एक ऐतिहासिक यात्रा रहा है, जहां उन्होंने न सिर्फ बीजेपी को खड़ा किया, बल्कि उसे सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
जन्म और शुरुआती जीवन
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध प्रांत अब पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल से अपनी पढ़ाई की। विभाजन के बाद वे भारत आ गए और जनसंघ के माध्यम से राजनीति की शुरुआत की। 1972 में जब अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में खत्म हो रहा था, तब पार्टी में नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा चल रही थी। उसी दौरान अटल जी ने खुद आडवाणी को अध्यक्ष बनने का सुझाव दिया। शुरू में आडवाणी ने मना किया, यह कहते हुए कि “मुझे भाषण देना नहीं आता”, लेकिन अटल जी के समझाने पर दिसंबर 1972 में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 1980 में जनसंघ से ही BJP की स्थापना हुई, और आडवाणी इसके सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बन गए।
राम मंदिर आंदोलन और रथ यात्रा
1990 के दशक में देश में राम मंदिर आंदोलन के दौरान आडवाणी का नाम हर घर में गूंजने लगा। उन्होंने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा हिंदुत्व राजनीति के विस्तार की बड़ी वजह बनी। रथ यात्रा के दौरान हर राज्य और शहर में लोगों ने उनका स्वागत किया। हालांकि, बिहार में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिससे यह यात्रा अधूरी रह गई लेकिन इसने बीजेपी के लिए नया जनाधार तैयार कर दिया।
अटल-आडवाणी की अटूट जोड़ी
अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित जोड़ी माने जाते हैं। 1957 में जब आडवाणी दिल्ली आए, तो वे अटल जी के सरकारी निवास 30 राजेंद्र प्रसाद रोड में ही रहे। दोनों ने साथ में जनसंघ को आगे बढ़ाया, संसद में काम सीखा और आपातकाल के दौरान जेल भी साथ में काटी। 1999 में जब एनडीए की सरकार बनी, तो अटल जी प्रधानमंत्री और आडवाणी गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री बने।





