नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राजस्थान सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में एक कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून पेश करने जा रही है। इस कानून का उद्देश्य बल, धोखे या कपटपूर्ण तरीकों से किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
पुराना मसौदा वापस, नया विधेयक होगा सख्त
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में तय हुआ कि पिछले सत्र में पेश किए गए पुराने विधेयक को वापस लेकर नया और ज्यादा कड़ा विधेयक लाया जाएगा। विधि मंत्री जोगाराम पटेल और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने बताया कि अब तक राजस्थान में अवैध धर्मांतरण से निपटने के लिए कोई विशेष कानून नहीं था।
क्या होंगे प्रावधान?
नए विधेयक में अवैध धर्मांतरण के मामलों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। सामान्य मामलों में: 7 से 14 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना। नाबालिग, महिला, विकलांग या SC/ST मामले में: 10 से 20 साल जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना। सामूहिक धर्मांतरण: 20 साल से आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माना। विदेशी फंड से धर्मांतरण: 10 से 20 साल जेल और 20 लाख रुपये जुर्माना। जबरदस्ती/मानव तस्करी से जुड़े मामले: 20 साल से आजीवन कारावास और 30 लाख रुपये जुर्माना। बार-बार अपराध करने पर: आजीवन कारावास और 50 लाख रुपये जुर्माना। साथ ही, अवैध धर्मांतरण में इस्तेमाल हुई संपत्ति जब्त या ध्वस्त की जा सकती है और संस्थानों का पंजीकरण भी रद्द किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना को लागू करने का फैसला भी किया। 27 लाख परिवारों को 1.1 किलोवाट रूफटॉप सोलर पैनल मुफ्त लगाए जाएंगे। उपभोक्ताओं को हर महीने 150 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। केंद्र सरकार 33,000 और राज्य सरकार 17,000 रुपये की सब्सिडी देगी।इस योजना से 1.04 करोड़ परिवारों को फायदा और राज्य में 3,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा पैदा होगी। राजस्थान कॉलेज शिक्षा समिति द्वारा संचालित 374 कॉलेजों में 4,724 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती होगी। शहरी क्षेत्रों में सीवरेज और अपशिष्ट जल नीति, 2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई, ताकि हर घर को सीवरेज व्यवस्था से जोड़ा जा सके।





