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बंगाल चुनाव : रानीगंज में नवोदित उम्मीदवार डॉ. विजन के भरोसे भाजपा

मधुप कोलकाता, 25 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बर्दवान जिले की रानीगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी को बहुत उम्मीदें हैं। इसकी वजह यह है कि शिल्पांचल की इस अहम सीट पर गत लोकसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी लीड मिली थी। पार्टी ने इस सीट से डाक्टर विजन मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है। इनका और परिवार में किसी का राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा। चिकित्सक विजन मुखर्जी की अपनी कोई राजनीतिक पहचान नहीं है। यही वजह है कि जब रानीगंज से भाजपा उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की घोषणा हुई तो पार्टी के ही एक गुुट ने विरोध किया। हालांकि धीरे-धीरे विजन की स्वीकार्यता बढ़ी और पार्टी का अंतर्विरोध समाप्त होता गया। रविवार को "हिन्दुस्थान समाचार" से वार्ता के दौरान डॉ. मुखर्जी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी जीत के दावे करते हुए पार्टी में असंतोष की बात को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कोई मतभेद नहीं है। पार्टी के सभी कार्यकर्ता साथ मिलकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला कर रहे हैं। आपकी जीत के दावे का आधार क्या है? इस पर विजन मुखर्जी ने कहा, "कोयला खदान वाले इलाकों में रहने वाले अधिकांश लोग हिंदी भाषी हैं। उनका वोट तो मिलना ही है। अल्पसंख्यक समुदाय के बहुत से लोग यहां रहते हैं, जो मुझे मानते हैं। रानीगंज, अंडाल, काजोड़ा जैसे इलाकों में घर-घर जाकर लोगों से वोट मांगा तो लोगों ने दोनों हाथों से आशीर्वाद दिया। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गत विधानसभा चुनाव में रानीगंज विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी 25 हजार वोटों से आगे रही थी।" राजनीति में नये होने के बावजूद इलाके में बतौर चिकित्सक विजन मुखर्जी की अपनी एक अलग पहचान है। कदाचित साफ-सुथरी छवि की वजह से ही पार्टी ने उन्हें पराने कार्यकर्ताओं पर वरीयता देते हुए उम्मीदवार बनाया है। 42 वर्षीय विजन मुखर्जी की मां स्कूल शिक्षिका रही हैं, जबकि उनकी पत्नी आसनसोल बीबी कॉलेज की अध्यापिका हैं। स्वयं को रानीगंज का भूमिपुत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरा जन्म और पढ़ाई लिखाई सब रानीगंज में ही हुआ है। कितनी पीढ़ियों से हम यहां रहते हैं यह बताना मुश्किल है। मेरे दादाजी के दादाजी ने यहां कच्चा मकान बनाया था। अभी मैं जिस घर में रहता हूं उस घर की उम्र 100 साल से ज्यादा है। मेरे पिता प्रतिष्ठित वकील थे।" विजन मुखर्जी ने बिहार से एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कुछ समय तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में नौकरी की। इसके बाद हैदराबाद से स्त्री रोग में एमएस एवं दिल्ली से अल्ट्रासाउंड में पीजी की डिग्री हासिल कर रानीगंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सक के तौर पर अपनी सेवाएं देने लगे। इसी वजह से इलाके में उनकी अच्छी पहचान है। पहले से आपका कोई राजनीतिक लक्ष्य रहा है? इस सवाल पर विजन मुखर्जी ने बताया कि ऐसा कोई लक्ष्य नहीं था। हां वाजपेयी, मोदी, शाह की भावधारा से मैं प्रभावित था। गत दिसंबर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के कहने पर मैं पूरी तरह से सक्रिय राजनीति में आ गया। अपनी दोनों बेटियों को प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरी बड़ी बेटी पांच साल की है। उसके जन्म के बाद ही मुझे पेशागत सफलता मिली थी, जबकि मेरी 7 माह की दूसरी बेटी के जन्म के बाद मेरा राजनीति में आना हुआ। उल्लेखनीय है कि रानीगंज में सातवें चरण के तहत 26 अप्रैल को मतदान होना है। हिन्दुस्थान समाचार

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