नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। गणतंत्र दिवस की शाम को अटारी बॉर्डर पर रोज की तरह ही बीटिंग द रीट्रीट सेरेमनी का आयोजन होता है लेकिन जोश कई गुना हो जाता है।
पूरा देश आज अपना क्षेत्र में गणतंत्र दिवस मना रहा है। सुबह 10:30 से दिल्ली के कर्तव्य पथ पर शुरू हुई परेड में भारतीय सेना के तीनों अंगों ने अपने शौर्य और साहस का प्रदर्शन किया। शाम होते होते यह जोश पंजाब के एडोरी वाघा बॉर्डर पर भी देखने को मिला। बीटिंग थे रिट्रीट कार्यक्रम वैसे तो अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर रोज होता है लेकिन गणतंत्र दिवस के चलते इसके मायने आज और बढ़ गए हैं। भारतीय सेना ने पाकिस्तान सेना के सामने अपने जोश से देश भक्ति की लहर को प्रबल किया।
बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी का ऐतिहासिक संदर्भ
बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी को अगर आसान भाषा में समझा जाए तो यह युद्ध खत्म होने का संकेत है। पुराने समय में जब दो रियासत या रजवाड़ों के बीच युद्ध हुआ करता था तो युद्ध विराम की घोषणा के बाद दोनों पक्षों की सेनाओं को एक बीटिंग द रिट्रीट रिंग के जरिए आह्वान कर दिया जाता था जिसके बाद दोनों सेनाएं अपने-अपने क्षेत्र में लौट जाती थी। मौजूदा समय में भी इसी परंपरा को जीवित रखने के लिए बीटिंग थे रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन किया जाता है। यह कार्यक्रम सूरज के छिपने से पहले खत्म किया जाता है जिसकी अवधि 30 मिनट की होती है।





