नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिलहाल मस्जिद की रंगाई-पुताई और मरम्मत की अनुमति नहीं दी है, लेकिन मस्जिद परिसर में साफ-सफाई कराने का आदेश दिया है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) इस कार्य को अंजाम देगा। मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्ष दोनों को 4 मार्च तक अपनी आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया गया है।
कोर्ट में क्या हुआ?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। ASI ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि मस्जिद की दीवारों पर पहले से ही पेंटिंग मौजूद है, इसलिए नए सिरे से रंगाई की कोई आवश्यकता नहीं है। मस्जिद कमेटी ने ASI की इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और कोर्ट से रंगाई-पुताई और मरम्मत की इजाजत मांगी। वहीं, हिंदू पक्ष ने भी कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 4 मार्च तक अपने दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।
रमजान से पहले मिलेगी सफाई की इजाजत
2 मार्च से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। इस दौरान रोजेदारों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसलिए हाईकोर्ट ने मस्जिद परिसर में सफाई कराने की इजाजत दे दी है। हालांकि, मरम्मत और सफेदी का काम होगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला 4 मार्च को सुनाया जाएगा। मस्जिद कमेटी ने इससे पहले संभल के डीएम को पत्र लिखकर ASI से रंगाई-पुताई की अनुमति देने की मांग की थी, लेकिन ASI ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया।
क्या है अगला कदम?
अब इस मामले में अंतिम निर्णय 4 मार्च को होगा, जब दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और कोर्ट यह तय करेगा कि मस्जिद की मरम्मत और सफेदी की अनुमति दी जाए या नहीं। तब तक मस्जिद परिसर में केवल सफाई कार्य किया जा सकता है।





