नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर से पूर्व विधायक मोहम्मद आज़म ख़ान को एक और बड़ी कानूनी राहत मिली है। जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज बहुचर्चित क्वालिटी बार जमीन मामले में उन्हें जमानत दे दी है। इसके साथ ही लंबे समय से सीतापुर जेल में बंद आज़म ख़ान की रिहाई की राह अब लगभग साफ हो गई है।
17 साल पुराने केस में बरी
कुछ ही दिन पहले आज़म ख़ान को 2008 के सड़क जाम और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट से क्लीन चिट मिली थी। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। बचाव पक्ष के 7 गवाहों के मुकाबले, अभियोजन सिर्फ 1 गवाह ही पेश कर सका। मामला तब का है जब पुलिस ने उनकी गाड़ी से हूटर हटाया था और इस पर आज़म ने समर्थकों के साथ मिलकर छजलेट थाने के पास प्रदर्शन किया था, जो बाद में हिंसक हो गया था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा। तो वहीं बचाव पक्ष ने जहां 7 गवाह पेश किए, वहीं अभियोजन सिर्फ 1 गवाह ला सका। इसी कारण सबूतों के अभाव में कोर्ट ने आज़म ख़ान को बरी कर दिया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राहत, अब रिहाई तय मानी जा रही
रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज ज़मीन कब्जे के मामले में हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा था। अब जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए उन्हें ज़मानत दे दी है। अगर कोई अन्य मामला लंबित नहीं है, तो आज़म ख़ान की रिहाई महज़ औपचारिकता भर रह गई है।
क्या अब बाहर आएंगे आज़म?
अब जबकि एक केस में बरी और दूसरे में जमानत मिल चुकी है, तो ऐसे में यह माना जा रहा है कि अगर कोई अन्य मामला शेष नहीं है, तो आज़म ख़ान को जल्द ही जेल से रिहा किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम औपचारिकताएं पूरी होते ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
सियासत गरमाई, समाजवादी खेमा उत्साहित
आज़म ख़ान को मिली राहत के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है। जहां सपा समर्थक इस फैसले को न्याय की जीत बता रहे हैं। तो वहीं, विरोधी खेमे में इस पर अब तक सन्नाटा पसरा है, लेकिन बयानबाज़ी कभी भी शुरू हो सकती है।
क्या अब बदलेगा यूपी की सियासत का मिज़ाज?
आज़म ख़ान की वापसी से समाजवादी पार्टी की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। सवाल ये है क्या अब आज़म फिर से राजनीति के मैदान में पूरी ताक़त से उतरेंगे?





