नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली के मशहूर स्कूल DPS द्वारका में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्कूल ने फीस न भरने पर 34 बच्चों को स्कूल से निकाल दिया। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है। आतिशी ने अपने पत्र में कहा कि यह घटना न केवल अमानवीय है, बल्कि बच्चों की मानसिक सेहत पर भी गहरा असर डाल सकती है। उन्होंने बताया कि इन बच्चों को स्कूल गेट पर ही रोक लिया गया और जबरन उन्हें वापस भेज दिया गया। इतना ही नहीं, पिछले कुछ दिनों से इन बच्चों को कक्षा में बैठने नहीं दिया जा रहा था और लाइब्रेरी में बैठाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था।
बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप
आतिशी ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब कभी किसी निजी स्कूल को मनमानी करने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन अब जब दिल्ली में बीजेपी की सरकार है, तो निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और छात्रों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 3 महीनों में स्कूलों ने भारी फीस और अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी की है। इसके खिलाफ अभिभावकों ने बार-बार आवाज उठाई, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
DM की रिपोर्ट के बावजूद कोई कदम नहीं
आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने एक कमेटी बनाई थी जिसने DM के नेतृत्व में जांच की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि DPS द्वारका बच्चों को प्रताड़ित कर रहा है। फिर भी सरकार ने अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया। सौरभ भारद्वाज ने बताया कि जिन छात्रों के माता-पिता ने बढ़ी हुई फीस नहीं दी, उन्हें स्कूल में एंट्री तक नहीं दी गई। जब बच्चे सुबह स्कूल पहुंचे, तो गेट पर ही उन्हें बस में वापस बैठा दिया गया और घर भेज दिया गया। यह घटना अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए बेहद अपमानजनक और दर्दनाक रही।
क्या मांग की गई है?
आतिशी और आप नेताओं ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग की है कि DPS द्वारका द्वारा निकाले गए 34 बच्चों का निष्कासन तुरंत रद्द किया जाए। स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया जाए कि जब तक ऑडिट पूरा न हो, तब तक किसी भी प्रकार की फीस वृद्धि स्थगित की जाए। यह मामला दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस पर क्या कदम उठाती हैं और क्या इन 34 मासूम छात्रों को दोबारा स्कूल में वापस लाया जा सकेगा।





