नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक में 17 सितंबर 2024 को आतिशी मार्लेना को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल आज 17 सितंबर 2024 को दोपहर 04:30 बजे दिल्ली के उपराज्यपाल को अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जिसके बाद जल्द ही आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी मार्लेना को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। बता दें कि विधायक दल की बैठक में अरविंद केजरीवाल ने आतिशी मार्लेना के नाम का प्रस्ताव सबके सामने रखा था। जिसको विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था।
राजधानी दिल्ली में ऐसा तीसरी बार होने जा रहा है
राजधानी दिल्ली में ऐसा तीसरी बार होने जा रहा है, जब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी किसी महिला को सौंपी जा रही है। दिल्ली की सबसे पहली महिला सीएम स्वर्गीय सुषमा स्वराज बनी थी। यह बात अलग है कि उनका कार्यकाल सिर्फ 52 दिन का ही रहा। स्वर्गीय सुषमा स्वराज के बाद स्वर्गीय शीला दीक्षित दिल्ली की दूसरी महिला सीएम बनी थी। उनका कार्यकाल पूरे 15 साल का था। अब जल्द ही आतिशी मार्लेना दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगी।
आतिशी पार्टी का युवा चेहरा बनकर सामने आई हैं
आतिशी का जन्म 8 जून, 1981को दिल्ली में हुआ। स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के स्प्रिंगडेल स्कूल से हुई थी। उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से की थी। कुछ साल बाद, उन्होंने शैक्षिक अनुसंधान में रोड्स स्कॉलर के रूप में ऑक्सफोर्ड से अपनी दूसरी मास्टर डिग्री हासिल की है। आतिशी पार्टी का युवा चेहरा बनकर सामने आई हैं। आतिशी आप प्रवक्ता भी रहीं हैं। उन्होंने जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया के सलाहकार के तौर पर काम किया और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए कई योजनाओं पर काम किया है।
आतिशी 2020 के विधानसभा चुनाव में पहली बार विधायक चुनी गईं। 2023 में केजरीवाल की सरकार में मंत्री बनी थी। उन्हें केजरीवाल की करीबी कहा जाता है। अन्ना हजारे के आंदोलन से वह संगठन में सक्रिय रही हैं। वह ऐसी मंत्री हैं जिनके पास सबसे अधिक मंत्रालय हैं। आतिशी को अरविंद केजरावाल का विश्वास पात्र माना जाता रहा है। आतिशी के पास इस समय दिल्ली के पांच विभाग हैं। यह विभाग हैं, महिला और बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा और पर्यटन मंत्रालय, कला संस्कृति और भाषा, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और पावर मिनिस्ट्री। शुरुआत से ही आतिशी को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। आतिशी के अलावा सौरभ भारद्वाज गोपाल राय और कैलाश गहलोत के नामों की चर्चा की जा रही थी।
स्वर्गीय सुषमा स्वराज राजधानी दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थी
स्वर्गीय सुषमा स्वराज राजधानी दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थी। वह भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता था थी। पार्टी ने उनपर भरोसा जताते हुए वर्ष 1998 में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। स्वर्गीय सुषमा स्वराज से पहले साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, जिनको प्याज के बढ़ते दामों के कारण अपनी सीएम की कुर्सी छोडनी पड़ी थी। स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने दिल्ली के सीएम के रूप में 52 दिन तक बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। क्योंकि इसके बाद दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हुए थे।
भारतीय जनता पार्टी को उस विधानसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा को केवल 15 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। विधानसभा चुनाव के चलते स्वर्गीय सुषमा स्वराज को दिसंबर में ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने अक्टूबर में ही सीएम पद की शपथ ली थी। बता दें कि स्वर्गीय सुषमा स्वराज भाजपा की एक तेज तर्रार नेता थी, उन्होंने पार्टी में कई अहम जिम्मेदारी निभाई थी। स्वर्गीय सुषमा स्वराज के केंद्रीय विदेश मंत्री के रूप में लिए गए फैसलों की खूब सराहना की जाती है।
स्वर्गीय शीला दीक्षित ने दिल्ली की दूसरी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी
भाजपा की एक तेज तर्रार नेता स्वर्गीय सुषमा स्वराज के बाद कांग्रेस की वरिष्ठ नेता स्वर्गीय शीला दीक्षित ने दिल्ली की दूसरी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। कांग्रेस ने वर्ष 1998 में विधानसभा के चुनाव में बहुमत मिलने के बाद स्वर्गीय शीला दीक्षित यह जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद वर्ष 2003 और 2008 में भी कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस ने स्वर्गीय शीला दीक्षित पर फिर से भरोसा जताया और उन्हें लगातार तीन बार दिल्ली के सीएम का पदभार सौंपा।
लेकिन वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा था। क्योंकि वर्ष 2013 में अन्ना आंदोलन की शुरुआत हुई थी और इससे ही आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था। अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाकर वर्ष 2013 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। दिल्ली की जनता ने आप को 28 विधानसभा सीटों में, कांग्रेस को 8 विधानसभा सीटों और भाजपा को 34 विधानसभा सीटों पर जीत दिलाई थी। जिसके बाद कांग्रेस ने आप को अपना समर्थन दे दिया और अरविंद केजरीवाल ने बहुमत मिल जाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पदभार संभाला था।




