नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के संसद में दिए गए एक बयान पर देश से माफी मांगी है। यह बयान ईद की नमाज और मुस्लिम समुदाय से जुड़ा था, जिस पर काफी विवाद खड़ा हो गया है। गौरव गोगोई ने संसद में वक्फ बोर्ड से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों को ईद पर सड़कों पर नमाज पढ़ने से रोकती है। उन्होंने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन बताया और बीजेपी की नीयत पर सवाल उठाए।
सीएम सरमा ने जताई शर्मिंदगी
मुख्यमंत्री सरमा ने इस बयान पर नाराज़गी जताई और कहा कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि असम से चुना गया एक सांसद ऐसा बयान दे रहा है। उन्होंने कहा,”देश भर से लोग मुझे कॉल कर रहे हैं। हम शर्मिंदा हैं और मैं मुख्यमंत्री के तौर पर देश से माफी मांगता हूं।
“असम में मस्जिदें हैं, सड़क पर नमाज की जरूरत नहीं”
सरमा ने कहा कि असम में सुंदर और बड़ी मस्जिदें हैं, इसलिए यहां के लोग सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ते और न ही इसकी मांग की गई है। उन्होंने सांसद पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ एक समुदाय की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को उजागर किया, जबकि महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस और गोपीनाथ बोरदोलोई जैसे नेताओं का नाम नहीं लिया। असम में जल्द ही पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस मुद्दे के बीच सीएम सरमा ने भरोसा जताया कि बीजेपी को सभी चुनावों में जनता का समर्थन मिलेगा, क्योंकि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है।
बयान से मचा सियासी तूफान
गौरव गोगोई के बयान ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के मुद्दे को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री की माफी और नाराजगी यह दिखाती है कि इस बयान को राज्य सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। अब देखना होगा कि इसका असर आने वाले चुनावों और राजनीतिक माहौल पर क्या पड़ता है।





