नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम की प्रशासनिक सेवा अधिकारी नुपूर बोरा आय से अधिक संपत्ति रखने और रिश्वत लेने के आरोपों में गिरफ्तार हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके गुवाहाटी आवास से 92 लाख रुपये नकद और लगभग 2 करोड़ रुपये के जेवरात बरामद किए गए हैं। इसके अलावा तीन अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
बोरा 1500 से 2 लाख तक रिश्वत वसूलती थीं
राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि बोरा पर पिछले 6 महीने से कानूनी नजर रखी जा रही थी। आरोप है कि उन्होंने जमीन से जुड़े लेन-देन में पैसों के लिए हिंदुओं की जमीन संदिग्ध लोगों को दे दी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, बोरा 1500 से 2 लाख तक रिश्वत वसूलती थीं। इस मामले में कृषक मुक्ति संग्राम समिति (KMSS) ने भी शिकायत दर्ज कराई थी।
नुपूर बोरा कौन हैं?
जन्म: 31 मार्च 1989, गोलाघाट जिला
शिक्षा: गुवाहाटी यूनिवर्सिटी (अंग्रेजी साहित्य), कॉटन कॉलेज
सेवा: असम सिविल सर्विस अधिकारी, मार्च 2019 से
सहायक आयुक्त, कार्बी अंगलोंग (2019–2023)
सर्किल ऑफिसर, बरपेटा और कामरूप
सिविल सेवा में आने से पहले लेक्चरर भी रह चुकी हैं।
पुलिस और जांच की स्थिति
एसपी रोज कलीता ने कहा कि बोरा के खिलाफ कई गंभीर आरोप हैं और जांच अभी जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि जांच पूरी होने तक और भी कैश और अन्य चीजें बरामद की जा सकती हैं। महज 6 साल की सेवा में इतनी संपत्ति और विवादित लेन-देन ने नुपूर बोरा के करियर को सवालों के घेरे में ला दिया है। असम प्रशासन और जनता की नजर अब इस मामले पर टिकी हुई है।
सिविल सर्विस अधिकारी नुपूर बोरा
असम की सिविल सर्विस अधिकारी नुपूर बोरा पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने बारपेटा में अपनी तैनाती के दौरान सरकारी और धार्मिक ट्रस्ट की जमीन को गैरकानूनी तरीके से संदिग्ध लोगों के नाम किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकतर जमीनें हिंदुओं की थीं।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई। छापेमारी में नूपूर बोरा के घर से करीब 90 लाख नकद और लगभग 1 करोड़ रुपये के जेवरात बरामद हुए। अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 2 करोड़ रुपये है।
नुपूर बोरा फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं। आरोप है कि मात्र 6 साल की सेवा में इतनी संपत्ति बनाना संदिग्ध है। पुलिस जांच में संदेहास्पद लेन-देन और अन्य संभावित संपत्ति की तलाश कर रही है।इस मामले ने न केवल नुपूर बोरा के करियर को संकट में डाल दिया है, बल्कि असम प्रशासन और जनता की निगाह अब इस घोटाले पर टिकी हुई है।





