नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली की आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं मिले, जिससे उन पर लगे आरोप साबित होते हों। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि केवल आरोप लगाने से अपराध साबित नहीं होता, उसके लिए पुख्ता साक्ष्य जरूरी होते हैं। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस की और सरकार पर जमकर हमला बोला।
फैसले के बाद भावुक हुए केजरीवाल
फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया अपने वकील से गले मिले। बाहर आकर मीडिया से बात करते समय केजरीवाल भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने कहा, “सत्य की जीत हुई है। हमारे खिलाफ झूठा केस बनाया गया था। कोर्ट ने हमें निर्दोष बताया। उन्होंने न्यायाधीश का धन्यवाद किया और कहा कि न्यायपालिका ने निष्पक्ष फैसला दिया है।
कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
विशेष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में कई खामियां थीं। अदालत के मुताबिक, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों को गवाहों या ठोस दस्तावेजों से ठीक तरह साबित नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। यह मामला नवंबर 2021 में लागू की गई नई आबकारी नीति से जुड़ा है। उस समय दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति लागू की थी। जुलाई 2022 में मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल ने मामले की जांच की सिफारिश की। इसके बाद 17 अगस्त 2022 को CBI ने केस दर्ज किया। 22 अगस्त 2022 को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया।
गिरफ्तारी और जांच की कार्रवाई
फरवरी 2023 में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। 21 मार्च 2024 को ED ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया। दोनों नेताओं ने लंबे समय तक जेल में समय बिताया और बाद में जमानत पर रिहा हुए। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि शराब नीति में 100 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत ली गई और कुछ रकम चुनाव में इस्तेमाल हुई। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए। इस मामले में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने सभी को आरोपमुक्त कर दिया और किसी के खिलाफ भी आरोप तय करने से इनकार कर दिया। इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। केजरीवाल और सिसोदिया शुरुआत से खुद को निर्दोष बताते रहे थे। फैसले के बाद पार्टी नेताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताया है। फिलहाल इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाएंगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।





