नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भाषाई विवाद की घटनाएं अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई हैं। अब तक कर्नाटक में हिंदी और महाराष्ट्र में मराठी को लेकर विवाद सुर्खियों में थे, अब यूपी में भोजपुरी न बोलने पर बवाल मचता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ग्राहक, रेस्टोरेंट के कर्मचारी से सिर्फ इसलिए बहस करता है क्योंकि वह भोजपुरी नहीं बोल पाता। वीडियो में ग्राहक कर्मचारी से गुस्से में कहता है: “तुम यूपी में हो, यहां भोजपुरी बोलनी ही पड़ेगी!” इस एक कथन ने इंटरनेट पर तीखी बहस छेड़ दी है।
इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने भाषा के आधार पर लोगों के साथ इस तरह के व्यवहार की कड़ी निंदा की है। अब उठ रहा सवाल है कि क्या उत्तर प्रदेश में भी पहचान, नौकरी और सम्मान भाषा के आधार पर तय होने लगे हैं?
यूपी में भोजपुरी न बोलने पर युवक से बदसलूकी
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे उत्तर प्रदेश का बताया जा रहा है। वीडियो में एक के साथ केवल इसलिए बदतमीजी की जाती है क्योंकि वह भोजपुरी नहीं बोल पाता। वीडियो में एक युवक गुस्से में कर्मचारी से कहता है, “तुम यूपी में हो, यहां भोजपुरी बोलनी पड़ेगी।” इसके बाद बहस और गर्म हो जाती है। कर्मचारी भी झुकने के बजाय जवाब देता है और उस युवक से रेस्टोरेंट छोड़ने को कहता है। यह सुनते ही सामने वाला व्यक्ति और अधिक भड़क जाता है और बात बिगड़ने लगती है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर चिंता और बहस दोनों का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर हिंदी भाषी राज्यों में ही भाषा को लेकर ऐसा रवैया अपनाया जाएगा, तो देशभर में भाषाई असहिष्णुता और गहराएगी। भाषा को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी को उसकी भाषा के आधार पर अपमानित करना न समाज स्वीकार करता है और न ही संविधान।
भाषा के नाम पर टकराव
कभी मराठी, कभी कन्नड़ और अब भोजपुरी वे भाषाएं जो अपनी मधुरता, संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती थीं, अब टकराव और दबाव का माध्यम बनती जा रही हैं। जिस उत्तर प्रदेश को उसकी भाषाई विविधता और आपसी सह-अस्तित्व के लिए जाना जाता है, वहां भी अब भाषा को लेकर सीमाएं खिंचने लगी हैं। यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकेत भी है। हाल ही में वायरल हुए वीडियो ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भाषा को लेकर जो असहिष्णुता कभी दक्षिण और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों तक सीमित थी, वह अब उत्तर भारत की धरती पर भी पांव पसार रही है। भाषा, जो लोगों को जोड़ने का जरिया होनी चाहिए, वह पहचान तय करने का औजार बनती जा रही है। सवाल यह है कि क्या अब किसी व्यक्ति को उसके काम, व्यवहार या योग्यता से पहले उसकी बोली या भाषा के आधार पर परखा जाएगा?
यूजर्स का फूटा गुस्सा, वायरल वीडियो पर आए तीखे रिएक्शन
यह वायरल वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर Ghar ke Kalesh नामक अकाउंट से साझा किया गया, जिसे अब तक लाखों बार देखा जा चुका है। वीडियो को बड़ी संख्या में लाइक्स, रीपोस्ट और कमेंट्स भी मिले हैं और लोग इस पर खुलकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भाषा के नाम पर की गई बदसलूकी की कड़ी आलोचना की है। एक यूजर ने लिखा – “उत्तर भारत वालों का दिल बहुत बड़ा होता है, लेकिन ऐसी घटनाएं शर्मिंदा करती हैं।” दूसरे ने गुस्से में लिखा – “भाषा के नाम पर ये गंद मचाना आखिर कब रुकेगा?” वहीं एक और यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा “सरकार और पुलिस तो जैसे सो रही है।”





