नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह आज 60 वर्ष के हो गए है। देश की शायद ही कोई व्यक्ति हो जो अमित शाह के बार में जानकारी न रखता हो। शाह भारतीय राजनीति में दिग्गजों की सूची में शुमार हैं। भारतीय जनता पार्टी को राजनीति के शून्य से शिखर तक ले जाने का क्रेडिट अमित शाह को ही दिया जाता है। उनकी रणनीतिक समझ और तीखे तेवर उन्हें एक आक्रामत नेता के तौर पर पेश करते हैं। अगर आज बीजेपी देश के अधिकतर हिस्से में सरकार चला रही है तो इसमें काफी श्रेय अमित शाह को ही जाता है।
2002 में मिली थी गुजरात सरकार में अहम जिम्मेदारी
अमित शाह की परवरिश RSS के विचारों के इर्द गिर्द ही हुई थी। उनका परिवार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारों से खासा प्रभावित था। इसका असर यह हुआ कि उन्होने अपने कॉलेज के दिनों में ही छात्र राजनीति में प्रवेश कर दिया था। उन्होने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ABVP से की थी। इसके बाद अपने संघर्ष की बदौलत बीजेपी में चले गए। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद वह पहली बार 2002 में गुजरात के गृह मंत्री के तौर पर सरकार में आए। यह वही साल था जो गुजरात सरकार के लिए सबसे कठिन साल था। इसी साल गुजरात में दंगे हुए थे जिसे संभालने का जिम्मा अमित शाह के पास ही था।
जब तड़ीपार कर दिए गए थे अमित शाह
साल 2010 में अमित शाह के राजनैतिक जीवन में सबसे मुश्किल समय तब आया जब उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। दरअसल, 2010 में सोहराबुद्दीन शेख को एनकाउंटर में मार गिराया था। मामले की जांच CBI के हाथ में पहुंची तो जांच की आंच अमित शाह तक भी पहुंची। अमित शाह पर आरोप लगाया गया कि सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर में अमित शाह की भूमिका थी। इन आरोपो के चलते उन्हें 3 महीने जेल में रहना पड़ा था। हालांकि 29 अक्टूबर 2010 को उन्हें जमानत मिल गई लेकिन उन्हें यह आदेश भी दिया गया कि उन्हें गुजरात की सीमा से बाहर रहना होगा। इस दौरान वह 2 साल तक गुजरात से बाहर रहे तभी 2012 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही SC ने उन्हें इस रोक से आजादी दे दी गई।
2014 में भारी जीत के बाद BJP के चाणक्य कहलाए
BJP के लिए दिन बदलने की शुरुआत साल 2014 से हुई जब उन्होंने तत्कालीन गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। इस जीत के बाद जितनी सराहना संगठन की हुई उतनी ही प्रशंसा अमित शाह की रणनीति की हुई। शाह के पास जमीनी कार्यकर्ताओं के जुड़ने और तेज तर्रार रणनीति बनाने का गुर है। 2014 के बाद 2019 लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा जिसके बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। हालांकि अमित शाह कह चुके हैं कि “चाणक्य के सामने वह कुछ भी नहीं हैं। मैं वैसा कभी नहीं बन सकता हूं. हालांकि, मैंने उनके बारे में अच्छा से पढ़ा और समझा है। मेरे कमरे में उनकी तस्वीर भी है। मैं चाणक्य के आगे बहुत छोटा आदमी हूं।
अमित शाह के नेतृत्व में BJP बनी सबसे बड़ी पार्टी
अमित शाह के अध्यक्ष बनने से पहले तक बीजेपी के पास संगठन तो था लेकिन कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम शाह ने ही किया, पार्टी के पास कार्यकर्ताओं की फौज नहीं थी। शाह ने पार्टी की कमान संभालते ही 2015 में बीजेपी में बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान की शुरुआत की। पहली बार ऐसा हो रहा था, जब कोई पार्टी मिस्ड कॉल के जरिए लोगों को सदस्य बना रही थी।
PM मोदी के सबसे विश्वस्त
अमित शाह पीएम मोदी के सबसे विश्वस्त माने जाते हैं। इसकी झलक इस बात में देखने को मिलती है कि मोदी 3:0 में अमित शाह ने सबसे अहम माने जाने वाले गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली है। शाह के बीजेपी अध्यक्ष रहते ही उन्होंने देश के 71 फीसदी हिस्से में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के सपने को पूरा किया था।





