नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने देश में चल रहे समान नागरिक संहिता (UCC), मोहन भागवत और आंबेडकर मुद्दे पर बयान दिया है। रामभद्राचार्य ने कहा कि हिंदू धर्म के कई लोग इधर-उधर चले गए हैं, उन्हें वापस उनके घर बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस देश को हर हाल में समान नागरिक संहिता की जरूरत है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि दूसरे धर्म के लोग 25-25 बच्चे पैदा करते रहें और हिंदुओं पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
आंबेडकर मुद्दे पर क्या कहा?
इसके साथ ही आंबेडकर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा कि हम आंबेडकर का सम्मान करते हैं, यह नेहरू थे जिन्होंने उन्हें परेशान किया और वह हार गए। उन्होंने कहा, “आंबेडकर ने मनुस्मृति को फाड़कर गलत किया, इसमें कोई ऊंच-नीच की बहस नहीं थी. इसमें महिलाओं का सम्मान किया गया।” जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मीडिया द्वारा पूछा गया कि 22 से 25 करोड़ की आबादी वाले मुसलमानों को कहां जाना चाहिए? इस पर उन्होंने कहा, “मुसलमानों को कहीं नहीं जाना चाहिए, यहीं रहना चाहिए, लेकिन हमारे अस्तित्व का सम्मान करना चाहिए। मैंने कभी नहीं कहा कि यह देश मुसलमानों का नहीं है। हिंदुओं को उनका अस्तित्व मिटाकर रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”
हमारे मंदिर हमें सौंप दें- रामभद्राचार्य
रामभद्राचार्य ने कहा है कि “जहां भी सर्वे होगा, हम वहां दावा करेंगे। उन्हें भी बड़ा दिल दिखाना चाहिए, उन्हें हमारे मंदिर हमें सौंप देने चाहिए। हमने हिंदुओं से कहा है कि वे अपना हक लें। किसी को नुकसान न पहुंचाएं। हम मोहन भागवत को भी नहीं देंगे।” भागवत ने कहा कि किसी पर भी अत्याचार करने की बजाय बड़ा दिल दिखाएं। वही, संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उनका (केंद्रीय अध्यक्ष) बयान गैरजिम्मेदाराना है। मैं हिंदू धर्म का आचार्य हूं, मैं जगद्गुरु हूं. तो हिंदू धर्म का अनुशासन मेरा होगा। वह एक संगठन का प्रमुख है। उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। इतना ही नहीं रामभद्राचार्य ने कहा, पहले संघ कुछ और था और अब संगठन काफी बदल गया है।




