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संस्कृत में ग्रेजुएशन के साथ-साथ अपनी पसंद के दूसरे डिग्री पाठ्यक्रमों में भी ले सकेंगे दाखिला

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। यूजीसी भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से विभिन्न विषयों में संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम शुरू करने के लिए भारत में संस्कृत विश्वविद्यालयों के साथ काम करेगा। संस्कृत विश्वविद्यालयों में बहु-विषयक बनने की अपार संभावनाएं हैं। संस्कृत विश्वविद्यालयों के छात्रों को दोहरी डिग्री या ट्विन डिग्री की सुविधा मिलने पर यहां पढ़ने वाले छात्र संस्कृत विश्वविद्यालय के ही किसी अन्य पाठ्यक्रम में शामिल हो सकते हैं और दूरी डिग्री 2 डिग्री एक साथ प्राप्त कर सकते हैं। यही नहीं यहां पढ़ने वाले छात्रों को यदि किसी अन्य विश्वविद्यालय या कॉलेज का कोई अन्य पाठ्यक्रम पसंद आता है तो वह उसमें भी दाखिला ले सकते हैं। इस तरह से संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र अपनी पसंद की दूसरी डिग्री संस्कृत में पढ़ाई के साथ-साथ हासिल कर सकेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि संस्कृत की शिक्षा से छात्रों के लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित होंगे। संस्कृत को लेकर स्वयं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, यह एक भावना है। हमारा ज्ञान ही हमारा धन है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषाओं को एकजुट करने में संस्कृत का बहुत बड़ा योगदान है और अब संस्कृत विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के बहु-विषयक संस्थान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दरअसल संस्कृत यूनिवर्सिटी में यह नए बदलाव नई शिक्षा नीति से प्रेरित हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में परिकल्पना की गई है, सरकार ने संस्कृत सहित सभी भारतीय भाषाओं को महत्व दिया है। गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत लगातार क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार जेईई और मेडिकल के लिए होने वाली एंट्रेंस परीक्षा नीट में भी इंग्लिश व 12 भारतीय भाषाओं में परीक्षा दी जा सकती है। यहां तक कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अंडर ग्रेजुएट दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में भी भारतीय भाषाओं को महत्व दिया जा रहा है। जहां अब तक कई कॉलेज और विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाएं केवल अंग्रेजी भाषा में होती थीं, वहीं अब नई शिक्षा नीति के अंतर्गत की गई इस पहल के बाद यह परीक्षाएं न केवल हिंदी बल्कि स्थानीय भाषाओं में भी आयोजित करवाई जाएंगी। --आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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