नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। AIMPLB ने आज कहा है कि वक्फ एक्ट 2013 में कोई भी ऐसा बदलाव, जिससे वक्फ संपत्तियों की हैसियत और प्रकृति बदल जाए या उन्हें हड़पना सरकार या किसी व्यक्ति के लिए आसान हो जाए, हरगिज माना नहीं जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे संबंधित बिल संसद में अगले हफ्ते पेश किया जा सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह स्पष्ट करना जरूरी समझता है कि वक्फ़ संपत्तियां मुसलमानों के बुजुर्गों द्वारा दिए गए वे उपहार हैं जिन्हें धार्मिक और चैरिटी के कामों के लिए वक्फ़ किया गया है। सरकार ने बस उन्हें नियंत्रित करने के लिए वक्फ़ एक्ट बनाया है।
भारत सरकार नहीं कर सकती संशोधन
भारत सरकार इस कानून में कोई ऐसा संशोधन नहीं कर सकती जिससे इन संपत्तियों की प्रकृति और हैसियत ही बदल जाए। उन्होंने कहा कि अब तक सरकार ने मुसलमानों से संबंधित जितने भी फैसले किए और कदम उठाए हैं, उनमें उनसे कुछ छीनने का ही काम हुआ है, दिया कुछ नहीं, चाहे वह मौलाना आजाद फाउंडेशन का बंद किया जाना हो, या अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप को रद्द करना, या फिर तीन तलाक से संबंधित कानून हो।
यह मामला केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं
उन्होंने कहा है कि यह मामला केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रहेगा। वक्फ़ संपत्तियों पर चोट करने के बाद आशंका है कि अगला नंबर सिखों और ईसाइयों की वक्फ़ संपत्तियों का और फिर हिंदुओं के मठों और अन्य धार्मिक संपत्तियों का भी आ सकता है।
संपत्ति हड़पने की साजिश है संशोधन बिल: ओवैसी
ओवैसी ने तो संशोधन बिल को वक्फ बोर्ड की संपत्ति हड़पने की साजिश बता दी है तो वहीं लखनऊ-दारुल उलूम प्रवक्ता सुफियान निज़ामी ने कहा है कि सरकार वक्फ़ एक्ट को मजबूती प्रदान करें, वक्फ़ से अवैध कब्ज़ों को सरकार हटाए, वक्फ़ बोर्ड के हाथों को सरकार मजबूत करें सही नीयत से सरकार बोर्ड की मदद करें, वक्फ़ जमीनों पर सरकारी इमारतों से लें। वक्फ़ एक्ट में कोई भी बदलाव हरगिज कबूल नहीं किया जाएगा।
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