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Monday, March 2, 2026
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यूपी में मिशन-27 के लिए AIMIM ने साफ किया अपना रास्ता, सिर्फ इस पार्टी से गठबंधन की संभावना

2027 विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM ने अपना रास्ता साफ कर लिया है। पार्टी ने थर्ड फ्रंट की रणनीति के तहत केवल बसपा से संपर्क की संभावना जताते हुए अन्य गठबंधनों से दूरी के संकेत दिए हैं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने यूपी में अपने चुनावी रुख को साफ कर दिया है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह थर्ड फ्रंट के तहत चुनाव लड़ेगी और फिलहाल केवल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से संपर्क की संभावना रखेगी। यह बयान AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने दिया है, जिससे यूपी की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।

2027 चुनाव के केंद्र में थर्ड फ्रंट

AIMIM प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का कहना है कि यूपी में थर्ड फ्रंट का गठन लगभग तय है। उनका मानना है कि प्रदेश में एक ऐसा वैकल्पिक राजनीतिक मोर्चा जरूरी है, जो मौजूदा बड़े गठबंधनों से अलग होकर जनता को नया विकल्प दे सके। उन्होंने कहा कि दलित और मुस्लिम वोटों को साथ लाकर एक मजबूत राजनीतिक आधार बनाया जा सकता है और इसी सोच के तहत बसपा से बातचीत की संभावना तलाशी जा रही है।

बड़े गठबंधनों से दूरी बनाएगी AIMIM

AIMIM ने साफ कर दिया है कि वह किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने के मूड में नहीं है। पार्टी का फोकस थर्ड फ्रंट को मजबूत करने पर है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव में प्रभावी भूमिका निभाई जा सके। शौकत अली ने कहा कि AIMIM अपने एजेंडे और विचारधारा के साथ चुनावी मैदान में उतरना चाहती है और समझौता सिर्फ उसी दल से होगा, जहां वोट ट्रांसफर को लेकर भरोसा हो। हाल ही में बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनकी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा था कि यदि कोई दल अपने वोट ट्रांसफर की गारंटी देता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। AIMIM इसी बयान को बातचीत की गुंजाइश के रूप में देख रही है और इसी आधार पर बसपा से संपर्क की संभावना जताई जा रही है। AIMIM का कहना है कि बिहार में चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के साथ जुड़े अनुभवों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अन्य नेताओं से भी संवाद में है। लेकिन उत्तर प्रदेश में फिलहाल बसपा को ही प्राथमिक विकल्प माना जा रहा है। AIMIM के इस रुख के बाद यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बसपा इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है और थर्ड फ्रंट की तस्वीर कितनी मजबूत बन पाती है।

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