नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मृत्यु के बाद आंख या कोई अंग किसी को देने की बात को आपने सुनी होगी। लेकिन कैसा रहेगा अगर कहें कि आपकी मृत्यु होने के बाद भी आपसे औलाद पैदा की जा सकती है। सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर हैं, लेकिन अखिल भार्तीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने अपने अनोखे शोध में इसका खुलासा किया है। एम्स द्वारा किए गए इस शोध में पाया गया कि किसी व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके शरीर में मौजूद शुक्राणु (स्पर्म) करीब साढ़े उन्नीस घंटों तक जिंदा रह सकते हैं। इन शुक्राणुओं का प्रयोग कर किसी महिला द्वारा मां बनने को सुख प्राप्त किया जा सकता है।
125 मृत शरीरों पर किया गया अध्ययन
एम्स भोपाल की टीम ने 125 मृत शरीर पर अध्ययन किया। इस टीम का नेतृत्व डॉक्टर राघवेंद्र विदुआ ने किया। बतां दें कि डॉक्टर राघवेंद्र एम्स भोपाल के फोरेंसिक मेडिसिन और टाक्सिकोलाजी विभाग के प्रोफेसर हैं। जिन 125 मृत शरीरों पर अध्ययन किया गया उसमें से 47.22 फीसद लोगों के शरीर में जिंदा शुक्राणु पाए गए।
शोध को मिली इंटरनेशल पहचान
डॉक्टर राघवेंद्र कुमार ने बताया उनके टीम द्वारा किया गया यह शोध देश का एकलौता ऐसा शोध है। उन्होंने इश बात पर जोर देते हुए कहा कि यह शोध एम्स भोपाल में मृत व्यक्तियों पर किया गया। उन्होंने बताया कि इस शोध को ग्रीस के एथेंस में आयोजित 26वें त्रिवार्षिक इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ लीगल मेडिसिन सम्मेलन में शामिल किया गया है।
आईवीएफ प्रक्रिया में काम आ सकेंगे शुक्राणु
डॉक्टर कुमार ने बताया कि शोध 2022 में आइसीएमआर, नई दिल्ली के सहयोग से शुरू किया गया था। साथ ही बताया कि शोध के दौरान 47.22 फीसद लोगों में पाए गए शुक्राणुओं को आईवीएफ प्रकिया के जरिए उपयोग में लाए जा सकते हैं। इस नई पद्धति के पेटेंट के लिए आइसीएमआर को आवेदन भेजा जा चुका है और शीघ्र ही पेटेंट मिलने की संभावना भी है।
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