नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। तमिलनाडु में बीजेपी और AIADMK के गठबंधन को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है। AIADMK ने साफ कर दिया है कि वह बीजेपी के साथ सिर्फ चुनाव लड़ने का गठबंधन करेगी, लेकिन अगर सरकार बनी तो कोई गठबंधन सरकार नहीं बनेगी। AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने यह बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
12 अप्रैल को ही हुआ था गठबंधन का ऐलान
दो साल की दूरी के बाद 12 अप्रैल को बीजेपी ने फिर AIADMK से हाथ मिलाया था। इस गठबंधन के लिए बीजेपी को राज्य अध्यक्ष के. अन्नामलाई को भी हटाना पड़ा था। इसके बाद नयनार नागेंद्रन को नया अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि 2026 का विधानसभा चुनाव EPS के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
EPS बोले – चुनावी गठबंधन है, सरकार का नहीं
AIADMK चीफ EPS ने कहा कि उनका बीजेपी से गठबंधन सिर्फ चुनाव तक सीमित है। अगर सरकार बनी तो वह गठबंधन सरकार को स्वीकार नहीं करेंगे। इस बयान से साफ है कि AIADMK बीजेपी के साथ सिर्फ मजबूरी में साथ आ रही है, मन से नहीं।
क्यों नाखुश है AIADMK?
AIADMK के कुछ नेताओं को बीजेपी से गठबंधन रास नहीं आ रहा। 2019 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में दोनों का प्रदर्शन कमजोर रहा। अल्पसंख्यक वोटों के नुकसान का भी डर है, खासकर वक्फ कानूनों को लेकर हुए विरोध के बाद। पार्टी को डर है कि बीजेपी के साथ गठबंधन से मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वोट कट सकते हैं। अन्नामलाई की कुर्बानी से हुआ गठबंधन संभव। AIADMK ने गठबंधन की एक बड़ी शर्त रखी थी – अन्नामलाई को हटाना। 2024 के चुनाव प्रचार में EPS और अन्नामलाई के बीच काफी तनाव देखने को मिला था। EPS ने अन्नामलाई को “प्रचार का भूखा” तक कहा था। इसी वजह से अन्नामलाई को 4 साल बाद अपना पद छोड़ना पड़ा।
कौन हैं अन्नामलाई?
40 साल के अन्नामलाई पुलिस अधिकारी से नेता बने हैं। उन्होंने ‘एन मन, एन मक्कल’ यात्रा के जरिए राज्य में पहचान बनाई। 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमाई, लेकिन हार मिली। पार्टी में अनुशासन दिखाते हुए उन्होंने गठबंधन के लिए खुद को पीछे किया।
अमित शाह की सफाई, अन्नामलाई अभी भी अध्यक्ष हैं
गठबंधन के ऐलान के समय जब अमित शाह से पूछा गया कि क्या AIADMK की मांग पर अन्नामलाई को हटाया गया? शाह ने कहा, “अन्नामलाई अभी भी तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष हैं। यही वजह है कि वे मेरे पास बैठे हैं।” AIADMK के बदले रुख से साफ है कि बीजेपी के लिए तमिलनाडु की राह आसान नहीं होगी। जहां एक तरफ दोनों दल चुनावी फायदे के लिए साथ आ रहे हैं, वहीं विश्वास की कमी और पुराने विवाद गठबंधन को कमजोर बना सकते हैं।




