नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पहलगाम हमले के बाद भारत लगातार एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान को उचित सबक सिखाने के बाद सरकार अब पाकिस्तान का समर्थन करने वाले देशों और उसके करीबी देशों पर भी कार्रवाई करने के मूड में आ चुकी है। इसमें तुर्की और अजरबैजान तो शामिल हैं ही, लेकिन बांग्लादेश, जिसके चीन के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, भी भारत की रडार पर है।
हाल ही में मोहम्मद यूनुस ने चीन में भारत को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं और अब उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत के एक कदम से ही ड्रैगन के इस मित्र को करोड़ों का नुकसान होगा। सबसे पहले अगर हम बांग्लादेश के खिलाफ भारत द्वारा की गई आर्थिक हड़ताल की बात करें तो भारत ने कई बांग्लादेशी सामानों के लिए भारतीय भूमि बंदरगाहों पर प्रतिबंध लगा दिया है। गौरतलब है कि यह कदम भारत द्वारा नौ अप्रैल को 2020 में दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा को वापस लेने के बाद उठाया गया है, जिसके तहत बांग्लादेश को भारतीय बंदरगाहों और दिल्ली हवाई अड्डे के माध्यम से मध्य पूर्व और यूरोप को निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। शनिवार, 17 मई को बंदरगाह ने बांग्लादेश से आयातित कई वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया, जिनमें तैयार वस्त्र और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद शामिल थे।
बांग्लादेश से आयात अब केवल दो बंदरगाहों तक सीमित
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा शनिवार (17 मई) को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि बांग्लादेश से सिले-सिलाए कपड़ों का आयात अब केवल दो बंदरगाहों, न्हा ट्रांग और कोलकाता बंदरगाह तक सीमित रहेगा, जबकि अन्य सभी बंदरगाहों से आयात पर प्रतिबंध रहेगा। मतलब साफ है कि अब बांग्लादेश जमीनी बंदरगाहों के बजाय समुद्री बंदरगाहों के जरिए ही निर्यात कर सकेगा। यह कदम विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) के निर्देश के बाद उठाया गया, जिसमें भारत सरकार ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर स्थल बंदरगाहों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया था तथा उन्हें केवल दो समुद्री बंदरगाहों तक सीमित कर दिया था। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि भारत द्वारा उठाए गए इस कदम से बांग्लादेश के 770 मिलियन डॉलर (लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) मूल्य के आयात पर असर पड़ सकता है और यह आंकड़ा कुल द्विपक्षीय आयात का लगभग 42 प्रतिशत है।
बांग्लादेश का अहंकार तोड़ने भारत ने लगाया है प्रतिबंध
आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में यह तनाव बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के बाद देखने को मिला है और खास बात यह है कि उन्होंने ये टिप्पणी चीन जाकर की है। हाल ही में चीन के इशारे पर नाचने वाले यूनुस ने वहां का दौरा किया और इस दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य चारों ओर से स्थल से घिरे हुए हैं और समुद्र तक पहुंच के लिए बांग्लादेश पर निर्भर हैं। उन्होंने बांग्लादेश को क्षेत्र में हिंद महासागर का एकमात्र रक्षक बताया तथा चीन को अपने व्यापार मार्गों का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया। जवाब में भारत ने बांग्लादेश का अहंकार तोड़ने के लिए बांग्लादेशी वस्तुओं के आयात के लिए बंदरगाहों पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया।
इसके अलावा और भी कई कारण हैं जिनके चलते भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम पिछले महीने ढाका द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर लगाए गए इसी प्रकार के प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। पिछले साल, बांग्लादेश ने 2024 के अंत से भारतीय वस्तुओं पर व्यापार प्रतिबंधों को बढ़ाना शुरू कर दिया था और पिछले महीने अप्रैल 2025 में, बांग्लादेश ने 5 मुख्य भूमि बंदरगाहों के माध्यम से भारतीय यार्न के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया और दर्जनों अन्य वस्तुओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया। वहीं, ढाका द्वारा भारतीय माल पर 1.8 रुपये प्रति टन प्रति किलोमीटर की दर से ट्रंसिट फीस लगाने से मामला और जटिल हो गया।





