नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार चुनाव के बाद लालू परिवार में पैदा हुई कलह मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से दूरी बना ली है और इस पर कई बड़े दावे किए हैं। इन घटनाओं के कुछ समय बाद रोहिणी ने अपने पिता को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर की। उन्होंने तीन साल पुरानी एक तस्वीर साझा की, जिसमें लालू यादव अस्पताल के कपड़ों में नजर आ रहे हैं। रोहिणी ने कैप्शन में बताया कि यह वह समय था जब उन्होंने अपने पिता को किडनी डोनेट की थी। पोस्ट में रोहिणी ने लालू यादव के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्हें “मेरे भगवान समान पापा” बताया।
रोहिणी आचार्य ने पिता लालू यादव को लेकर दिया भावुक संदेश
रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने आज शुक्रवार सुबह 7:37 बजे की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें सर्जरी शुरू होने से पहले लालू यादव अस्पताल के कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट में रोहिणी ने लिखा “कर्तव्य पथ का दिन. ये 5 दिसंबर 2022 की सुबह 7:37 की फोटो है. सर्जरी शुरू होने से पहले. आज 3 साल पूरे हुए. मेरे भगवान समान पापा को मेरी भी उम्र लग जाए।” इस संदेश में उन्होंने पिता के प्रति अपनी गहरी भावनाओं और श्रद्धा को व्यक्त किया।
रोहिणी आचार्य ने पिता को दी थी अपनी किडनी
साल 2022 में रोहिणी आचार्य ने अपने पिता और आरजेडी प्रमुख लालू यादव की जान बचाने के लिए अपनी किडनी डोनेट की थी। उस समय उन्हें इस धर्मपरायण कदम के लिए खूब सराहना मिली। लेकिन समय के साथ रोहिणी और लालू परिवार के बीच रिश्तों में दरार पड़ गई। 2025 तक स्थिति इतनी बिगड़ी कि रोहिणी ने अपने परिवार से सभी संबंध खत्म कर दिए।
घर छोड़ते समय रोहिणी ने अपने भाई तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उनका दावा है कि पिता को किडनी देने के बावजूद उन्हें परिवार से सम्मान नहीं बल्कि अपमान मिला। रोहिणी ने यह तक कहा कि घर में उनकी दी हुई किडनी को “गंदी किडनी” कहा गया और कुछ लोगों ने उनका ऑर्गेन डोनेशन केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया मान लिया।
इसके अलावा, रोहिणी ने सार्वजनिक रूप से यह बयान भी दिया कि शादी के बाद बेटियों को अपने मायके की तरफ अधिक झुकाव नहीं रखना चाहिए। उनका कहना था कि अगर पिता जैसे किसी प्रियजन को किडनी या कोई अन्य जरूरत पड़े, तो परिवार के बेटे आगे आएं, न कि बेटियां।





