नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आखिर लोकसभा को 10 साल बाद नेता प्रतिपक्ष मिल गया है। कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सौंप दी है। इससे पहले राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी और पिता राजीव गांधी भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। राहुल गांधी के पिता ने नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी वर्ष 1989-1991 तक निभायी। वहीं राहुल गांधी की मां ने वर्ष 1999-2004 तक यह जिम्मेदारी निभाई थी।
नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री का दावेदार माना जाता है
आमतौर पर देखा गया है कि नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री का दावेदार माना जाता है। लेकिन भारतीय इतिहास में अभी तक 14 में से 13 नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद प्रधानमंत्री के पद तक नहीं पहुंच पाए हैं। इन 13 नेता प्रतिपक्ष में से तीन नेता प्रतिपक्ष ऐसे रहे, जिनका इस पद का कार्यभार पूरा करने के बाद, राजनीतिक करियर ही खत्म हो गया।
तब से ही नेता प्रतिपक्ष को कई शक्तियां दी गईं हैं
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष पद के बारे में संसदीय विधि में लिखा हुआ है। वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी पहली बाद केंद्र की सत्ता में आयी तो इस पद(नेता प्रतिपक्ष) को परिभाषित किया गया था। तब से ही नेता प्रतिपक्ष को कई शक्तियां दी गईं हैं। नेता प्रतिपक्ष ही लोकसभा में लोक लेखा समिति के मुखिया होते हैं। इसके अलावा भी बहुत सारे पदों पर की जाने वाली नियुक्तियों में भी नेता प्रतिपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। नेता प्रतिपक्ष सदन में विपक्ष की प्रमुख आवाज होते हैं।
अब राहुल गांधी 15 वें नेता प्रतिपक्ष बने हैं
भारत के इतिहास में नेता प्रतिपक्ष के पद की जिम्मेदारी निभाने वाले 14 में 13 नेताओं को प्रधानमंत्री की कुर्सी नसीब नहीं हो पाई है। केवल अटल बिहारी वाजपेयी ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। यह बात अलग है कि नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने वाले कुछ नेता प्रधानमंत्री पद के दावेदार जरूर रहे। अब राहुल गांधी 15 वें नेता प्रतिपक्ष बने हैं।
जिसके बाद नरसिम्हा राव की भी राजनीति में विराम लग गया था
अब बात करते हैं उन तीन नेताओं की जिनके नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद राजनीति ही खत्म हो गई थी। जिसमे वर्ष 1969-71 तक नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने वाले राम सुभाग सिंह का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही जगजीवन राम भी नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद अपनी राजनीतिक पारी को आगे नहीं बढ़ा पाए थे।पीवी नरसिम्हा राव भी प्रधानमंत्री बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष बने थे, जिसके बाद उनकी भी राजनीति में विराम लग गया था।
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