नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। एक तरफ पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा है। लोग अपने शिक्षकों को याद कर उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं के महत्व के बारे में लोगों को सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से बता रहे हैं। वहीं इस समय उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भावी शिक्षक अपने भविष्य को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। भावी शिक्षकों का कहना है कि आज शिक्षक दिवस है, आज उनलोगों को स्कूल में होना चाहिये था, लेकिन वो यहां दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। दरअसल लखनऊ में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले को लेकर अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 69000 सहायक शिक्षक पदों के लिए भर्ती निकाली थी। इस भर्ती की परीक्षा 6 जनवरी 2019 को हुई। इस भर्ती में जेनरल कैटेगरी (अनारक्षित) का कटऑफ 67.11 फीसदी और OBC कैटेगरी का कटऑफ 66.73 फीसदी था। इस भर्ती के तहत करीब 68 हजार लोगों को नौकरी मिली। हालांकि इस दौरान इस भर्ती प्रक्रिया में कई ऐसे पेंच मिले जिसे देखकर लोगों ने इस भर्ती प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया।
भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन नहीं करने का लगाया गया आरोप
दरअसल इस भर्ती में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 की अनदेखी की गई। जिसके बाद इस भर्ती के विरोध में छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने लगे। छात्रों का कहना था कि नियमावली में साफ है कि कोई OBC वर्ग का अभ्यर्थी अगर अनारक्षित कैटेगरी के कटऑफ से अधिक नंबर पाता है तो उसे OBC कोटे से नहीं बल्कि अनारक्षित कैटेगरी में नौकरी मिलेगी। यानी वो आरक्षण के दायरे में नहीं गिना जाएगा।
OBC को 27 फीसदी की जगह मिले मात्र 3.86 फीसदी आरक्षण
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना था कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में OBC कैटेगरी को 27 फीसदी की जगह मात्र 3.86 फीसदी आरक्षण मिला। मतलब 69 हजार सीटों में से ओबीसी को 18598 सीट मिलनी चाहिये थी, लेकिन मिले मात्र 2637। वहीं सरकार का कहना था कि इस भर्ती में OBC वर्ग के 31 हजार लोगों को नियुक्ति की गई है।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
उस समय यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी। तब अखिलेश यादव ने 1 लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में समायोजित कर दिया था। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और सुप्रीम कोर्ट ने इस समायोजन को रद्द कर दिया। यानी जो शिक्षामित्र, सहायक शिक्षक बन गए थे वो फिर से शिक्षामित्र बन गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को आदेश दिया कि इन 1 लाख 37 हजार पदों पर भर्ती निकाली जाए। जिसपर योगी सरकार ने कहा कि हम एक साथ इतनी भर्ती नहीं कर सकते। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो चरणों में इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहा। इसका पहला चरण 2018 में पूरा हुआ जब योगी सरकार ने 68500 पदों के लिए वैकेंसी निकाली। इसके बाद इसके दूसरे चरण में 69 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई।
बता दें कि, बीते कई दिनों से अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षक अभ्यर्थी 69 हजार शिक्षकों की भर्ती को लेकर सड़कों पर उतरकर नारेबाजी कर रहे हैं। अभ्यर्थी नारेबाजी करते हुए कह रहे हैं कि योगी जी न्याय करो…केशव चाचा न्याय करो। वहीं बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।





