नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं, जिनकी तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। सबसे बड़ी खबर यह है कि इस बार चुनाव में ग्राम पंचायतों की संख्या में कमी आई है। नए परिसीमन के बाद राज्य में 512 ग्राम पंचायतें कम हो गई हैं, जबकि 11 नई पंचायतों का गठन भी हुआ है।
अब कितनी ग्राम पंचायतें रहेंगी?
2021 में हुए पंचायत चुनाव में 58195 ग्राम प्रधान चुने गए थे, लेकिन इस बार ये संख्या घटकर 57694 रह गई है। इसका सीधा असर पंचायत चुनाव की सीटों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि पंचायतों की संख्या कम होने की मुख्य वजह शहरी क्षेत्रों का विस्तार है। कई गांव अब शहरी सीमा में शामिल हो चुके हैं, इसलिए वहां पंचायतों की जरूरत नहीं रही।
किन जिलों में सबसे ज्यादा पंचायतें घटीं?
देवरिया: सबसे ज्यादा 64 ग्राम पंचायतें कम हुईं
आजमगढ़: 49 पंचायतें घटीं
प्रतापगढ़: 46 पंचायतें कम हुईं
इसके अलावा अन्य जिलों में भी संख्या में कमी आई है। उदाहरण के तौर पर:
अमरोहा – 21 पंचायतें घटीं
गाजियाबाद – 19 पंचायतें कम
कुशीनगर – 23 पंचायतें खत्म
संत कबीर नगर – 24 पंचायतें घटीं
मऊ – 26 पंचायतें घटीं
कहां-कहां बनीं नई पंचायतें?
कुछ जगहों पर नई ग्राम पंचायतों का गठन भी हुआ है। उदाहरण के लिए बहराइच में दो नई पंचायतें बनीं बस्ती में कोर्ट के आदेश पर दो पंचायतों का गठन हुआ आजमगढ़, बाराबंकी, फतेहपुर, गोरखपुर, हरदोई, प्रतापगढ़ और उन्नाव में एक-एक नई पंचायत बनी है उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल-मई 2025 में कराए जाने की संभावना है। ऐसे में परिसीमन की यह प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी के आधार पर वोटिंग और उम्मीदवारों का निर्धारण होगा। पंचायत चुनाव से पहले हुए इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा। जहां कुछ जगहों पर लोगों को अपनी पुरानी पंचायत खोनी पड़ी है, वहीं कुछ गांवों को नई पंचायत मिलने से प्रशासनिक सहूलियतें मिल सकती हैं।





