नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बहस की शुरुआत हुई, जो मंगलवार को भी जारी रही। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष उन सवालों में रुचि नहीं ले रहा जो देश की सैन्य सफलता को उजागर करते हैं। जैसे पाकिस्तान को हुआ नुकसान या उसके गिराए गए विमानों की संख्या। राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष यह जानना चाहता है कि भारत के कितने विमान गिरे, लेकिन यह नहीं पूछ रहा कि पाकिस्तान को हमने कितना नुकसान पहुंचाया।
ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष के तीखे सवाल, रक्षा मंत्री ने नहीं दिए सीधे जवाब
लोकसभा में सोमवार को हुई ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में विपक्ष ने सरकार से तीन अहम सवाल पूछे, हालांकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किसी पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
1. हमला कैसे हुआ? क्या खुफिया तंत्र विफल रहा? विपक्ष ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि पहलगाम आतंकी हमला आखिर कैसे हुआ? क्या इसमें खुफिया एजेंसियों की चूक रही? राजनाथ सिंह ने इस सवाल को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और हमले की परिस्थितियों या अब तक की जांच पर कोई जानकारी साझा नहीं की।
2. भारतीय वायुसेना को क्या नुकसान हुआ? विपक्ष ने यह भी पूछा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना को क्या नुकसान हुआ, खासकर तब जब विपक्ष लगातार यह दावा करता रहा है कि इस सैन्य कार्रवाई में राफेल विमान क्षतिग्रस्त हुए। विपक्ष ने इस संदर्भ में CDS अनिल चौहान के सिंगापुर में दिए गए बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, “7 मई को हमने एक लड़ाकू विमान खोया, लेकिन उसके बाद पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए रणनीति बदल दी गई।” रक्षा मंत्री ने इस सवाल पर कोई सीधा उत्तर नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि, “विपक्ष के सवाल की दिशा ही गलत है। परीक्षा में परिणाम मायने रखता है, न कि परीक्षा के दौरान टूटी पेंसिल या खोया पेन। हमारी सेना ने अपने सभी लक्ष्य पूरे किए, यही सबसे बड़ी बात है।”
“सही सवाल नहीं पूछ रहे, नतीजों पर ध्यान दें”
राजनाथ सिंह ने विपक्ष के सवालों को भ्रामक और दिशाहीन बताते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस बात की चिंता नहीं है कि भारत ने पाकिस्तान को कितना नुकसान पहुंचाया, बल्कि वह यह जानने में ज्यादा रुचि दिखा रहा है कि भारत को कितना नुकसान हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा, “अगर विपक्ष सही दिशा में सवाल करता, तो वह पूछता कि क्या हमने आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया? जवाब है – हां। क्या आतंक फैलाने वालों के आकाओं का अंत हुआ? इसका भी जवाब – हां।” उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि “छोटी-छोटी बातों में उलझने की बजाय हमें अंतिम परिणाम पर गौर करना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने अपने सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।”
3. विपक्ष ने पूछा- युद्ध विराम में क्या अमेरिका की कोई भूमिका थी?
इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीधा जवाब देने से परहेज किया और कहा कि, “ऑपरेशन रोका गया क्योंकि भारत ने अपने सैन्य और राजनीतिक लक्ष्य पूरे कर लिए थे। किसी विदेशी दबाव की बात पूरी तरह निराधार है।” हालांकि, इस मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रखी। उन्होंने संसद में कहा कि, “भारत ने युद्धविराम की पहल नहीं की थी। 22 अप्रैल से 17 जून के बीच प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।”
जयशंकर ने बताया कि “9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेताया था कि पाकिस्तान जवाबी हमला कर सकता है। इस पर भारत ने दो टूक कहा कि अगर हमला हुआ, तो करारा जवाब दिया जाएगा और दिया भी गया।” उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान के सीजफायर प्रस्ताव की बात उठाई, तो भारत ने स्पष्ट किया कि बात केवल DGMO स्तर पर होगी, किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “विदेश मंत्री के बयान पर आपको भरोसा नहीं, जिन्होंने संविधान की शपथ ली है। लेकिन विदेशी नेताओं की बातों को सच मान लेते हैं।”





