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Monday, March 23, 2026
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Mirzapur: जेल के अंदर मीना बाजार! आश्चर्यचकित कर देगी मीरजापुर जेल की कहानी, जाने क्यों है ये खास?

Mirzapur: मीना बाजार! भारत की प्राचीन कला की झलक और जेल में कैद गुनाहगारों में बदलाव की कहानी। ये कैदी जेल से छूटने के बाद अपराध की दुनिया से तौबा कर अच्छे नागरिक बन समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।

मीरजापुर, हि.स.। जेल के अंदर मीना बाजार! जी हां, यह सुन आपको आश्चर्य होगा कि जेल में तो कैदी होते हैं, मीना बाजार कैसे यहां तो लोग जाने से भी डरते हैं। फिर आइए आपको ऐसे आश्चर्यचकित करने वाले मीना बाजार से रूबरू ही नहीं कराएगा बल्कि भारत की प्राचीन कला की झलक दिखाएगा और जेल में कैद गुनाहगारों में अद्वितीय बदलाव की कहानी भी बताएगा। उम्मीद है कि अब ये कैदी जेल से छूटने के बाद अपराध की दुनिया से तौबा कर देश के अच्छे नागरिक बन समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।

उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त करने का प्रयास

वैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और शासन-सुशासन की मजबूत कड़ी से ही यह संभव हो सकेगा। ऐसे में सरकार अपराध रोकने के साथ अपराधियों में भी बदलाव व सुधार लाने की प्रयास कर रही है। प्रदेश का मुखिया होने के साथ धार्मिक-संस्कृति के सूत्रधार योगी आदित्यनाथ की यह योजना एक दिन जरूर बदलाव लाएगी। इसका परिणाम भी दिखने लगा है।

किसी कारणवश अपराध की पगडंडी से जेल की चहारदीवारी के बीच पहुंचे मीरजापुर जेल के कैदी अब अपने पापों का प्रायश्चित कर रहे हैं। खास बात यह है कि जेल के अंदर ही परिवार के जीविकोपार्जन के लिए आय भी अर्जित कर रहे हैं। यह सब जेल प्रशासन व विक्रम कारपेट के सहयोग से संभव हो पाया है।

कैदियों की सुबह संकट मोचक श्रीहनुमान की आराधना से होती है शुरू

जेलर अरूण कुमार मिश्र व विक्रम कारपेट के सीईओ ऋषभ कुमार जैन की जोड़ी ने जेल का नजारा ही बदल दिया है। यहां आने वाला हर शख्स जेल प्रशासन की व्यवस्था से संतुष्ट ही नहीं होगा, तारीफ करने से भी नहीं चूकेगा। घर-आंगन जैसी सुविधा से समृद्ध जेल के कैदी किसी भी चीज के लिए मोहताज नहीं हैं। जेल के अंदर भी खान-पान, रहन-सहन सब परिवार की तरह है। साफ-सफाई और बेहतर चिकित्सा सुविधा भी है।

यहां के कैदियों की सुबह संकट मोचक श्रीहनुमान की आराधना से शुरू होती है। जेल के अंदर प्रवेश करते ही ठीक सामने रामदूत हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित है, जहां जेल प्रशासन की ओर से समय-समय धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इससे कैदियों की मानसिक स्थिति सुधरने के साथ उनका संकट भी दूर होगा। मीरजापुर जेल में कुल 691 कैदी हैं। इसमें 33 महिला कैदी हैं।

पूर्वांचल भर में मीरजापुर जेल के सब्जियों की वैरायटी

1901 में बने मीरजापुर जेल का कोई कोना ऐसा नहीं है, जो खाली पड़ा हो। यहां खाने-पीने से लेकर हर वो सुविधा है, जो घर-परिवार में होना चाहिए। यहां तक कि खाने के लिए ताजी हरी सब्जियों की व्यवस्था भी कैदी खुद करते हैं। इसके लिए जेल के अंदर ही कैदियों ने खेती कर रखी है।

आवश्यकता से अधिक उपज होने पर मीरजापुर जेल से सब्जियों की वैरायटी पूर्वांचल भर में आपूर्ति की जाती है। इससे होने वाली आय कैदियों को ही दी जाती है। ताजी हरी सब्जियों से कैदी खुद के साथ दूसरों को भी तंदुरूस्त बना रहे हैं।

हुनर ने दिलाई पहचान

सबसे बड़ी बात यह है कि जेल की चहारदीवारी के बीच कैद बंदियों की पहचान अमेरिका-जर्मनी तक है। यह पहचान उन्हें उनकी हुनर से मिली है। दरअसल, मीरजापुर जेल के अंदर हथकरघा उद्योग का काम चलता है। इसमें बंदी दरी-कालीन की बुनाई करते हैं और उत्कृष्ट डिजाइनदार दरी-कालीन बनाकर बेहतरीन कला का प्रदर्शन करते हैं।

इसके लिए विक्रम कारपेट की तरफ से उन्हें सामान व डिजाइन दी जाती है। वैश्विक बाजार में चर्चित विक्रम कारपेट के जरिए बंदियों द्वारा बनाई गई दरी बेची जाती है, जो देश-विदेश के घर-आंगन की शोभा बढ़ाने के साथ अतिप्राचीन हथकरघा उद्योग को संजीवनी प्रदान कर रही है।

मोदी के डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पूरा करने में कैदी भी करेंगे मदद

अब बात करते हैं आधुनिक युग की तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पूरा करने में अब जेल में कैद बंदी भी मदद करेंगे। जेल से छूटने के बाद कैदी स्मार्ट और कम्प्यूटर चलाने में दक्ष होंगे। इसके लिए जेल के अंदर ही उन्हें कम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद आधुनिक युग में रोजगार के लिए उन्हें भटकना न पड़े। वहीं महिला कैदियों को जेल से छूटने के बाद किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े और वे आत्मनिर्भर बनें। इसके लिए सिलाई-कढ़ाई सिखाया जा रहा है।

कैदियों ने तीन वर्ष के अंदर 10 लाख रुपये कमाए

मीरजापुर जेल में तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके जेलर अरूण कुमार मिश्र ने जेलकर्मियों को अनुशासन के साथ काम करने की जो सीख दी है, वह उनके लिए काफी लाभकारी होगा। जेलर और विक्रम कारपेट के संयुक्त प्रयास से मीरजापुर जेल में 2018 से हथकरघा उद्योग चल रहा है। अब तक कैदियों ने दरी बुनाई कर 10 लाख रुपये मजदूरी के रूप में कमाया है। तीन वर्ष के अंदर एक-एक बंदी को करीब तीस-तीस हजार रुपये मिले हैं।

दीपावली पर महिला कैदियों को भी मिलेगा रोजगार

दीपावली के अवसर पर महिला कैदियों के लिए आय का जरिया बनाया जाएगा। इसके लिए 15 नवम्बर तक विक्रम कारपेट की ओर से जेल के अंदर ही महिलाओं को ऊन खोलने का काम दिया जाएगा, ताकि वे भी अपने काम में व्यस्त रहें और आत्मनिर्भर बनें।

इसके लिए महिलाओं को ऊन का लच्छा और चकरी दिया जाएगा। चकरी के माध्यम से महिलाएं लच्छेदार ऊन को खोलेंगी। प्रतिकिग्रा ऊन खोलने पर महिलाओं को छह से आठ रुपये मिलेगे। प्रति महिला प्रतिदिन 10 किग्रा लच्छेदार ऊन को आराम से खोल लेंगी।

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