Bengal News: ममता बनर्जी ने दी नेताजी को श्रद्धांजलि, कहा- नेताजी की गुमशुदगी का राज पता नहीं चल पाना शर्मनाक

Bengal News: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि दी है।
Mamata Banerjee
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कोलकाता, (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि दी है। इस अवसर पर ममता बनर्जी ने कहा कि यह देश के लिए शर्म की बात है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लापता होने के इतने वर्षों बाद भी लोग न तो यह जानते हैं कि उनके साथ क्या हुआ था और न ही उन्हें उनकी मौत की तारीख पता है।

आज कल राजनीतिक विज्ञापनों के लिए छुट्टियों की घोषणा की जाती है

उन्होंने नेताजी के लापता होने की जांच कराने का वादा न निभाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। केंद्र द्वारा राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए सोमवार को आधे दिन के अवकाश की घोषणा करने के संदर्भ में ममता ने कहा कि आज कल राजनीतिक विज्ञापनों के लिए छुट्टियों की घोषणा की जाती है। उन लोगों के लिए कोई घोषणा नहीं की गयी, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए अपनी जान न्यौछावर कर दी थी।

हम नहीं जानते कि उनके साथ क्या हुआ था। यह शर्मनाक है

ममता ने कोलकाता में नेताजी बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद कहा, ‘‘यह भारत का दुर्भाग्य है कि इतने वर्षों बाद भी हमारे पास नेताजी की मौत की तारीख नहीं है। हम नहीं जानते कि उनके साथ क्या हुआ था। यह शर्मनाक है।’’

ममता बनर्जी ने नेताजी को लेकर कही यह बात

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भाजपा ने सत्ता में आने से पहले नेताजी के लापता होने की जांच कराने का वादा किया था लेकिन बाद में वह भूल गयी। मैंने 20 वर्षों तक कोशिश की कि नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए लेकिन मैं नाकाम रही, कृपया मुझे माफ कर दीजिए।’’

इसके अलावा उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स पर भी पोस्ट लिखकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि दी। ममता ने लिखा, "जैसा कि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 127वीं जयंती मना रहे हैं , मेरा दिल एक सच्चे नायक के लिए गहरी प्रशंसा से भर जाता है, जो मेरे लिए प्रेरणा का एक शाश्वत स्रोत रहा है। उनका साहस, दूरदर्शिता और मातृभूमि के प्रति प्रेम ने मेरे भीतर गहरी भावनाओं को जगाया है।

नेताजी की भावना समय से परे है और स्वतंत्र भारत के हर दिल की धड़कन में जीवित है। आज, आइए हम उनकी यात्रा के सार से जुड़ें और उनके बलिदानों की नब्ज को महसूस करें। आज हम उनके दृष्टिकोण और विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।”

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