नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) बनाने वाले हुमायूं कबीर ने राज्य में तीसरे मोर्चे के गठन का ऐलान किया है। इस नए मोर्चे में वामपंथी दल, कांग्रेस, आईएसएफ और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। JUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने AIMIM के साथ गठबंधन को लेकर कहा कि 15 फरवरी तक सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उसके बाद मोर्चे की रूपरेखा पूरी तरह सामने आएगी।
बंगाल में चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प
हुमायूं कबीर ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नया और मजबूत तीसरा विकल्प जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लेफ्ट, कांग्रेस, ISF और AIMIM को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। हुमायूं कबीर ने जोर देते हुए कहा “हमें TMC के विरोध में एक साथ काम करना होगा। कई लोग हमारे साथ आने को तैयार हैं, लेकिन पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है।”
अभी दूरी बनाए हुए है लेफ्ट, कांग्रेस और ISF
हुमायूं कबीर की रैली और तीसरे मोर्चे की पहल के बावजूद लेफ्ट फ्रंट, कांग्रेस और ISF फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन दलों और जनता उन्नयन पार्टी के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। इस बीच हुमायूं कबीर हाल ही में कोलकाता में लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन मोहम्मद सलीम से भी मिल चुके हैं।
15 फरवरी तक गठबंधन में शामिल होने का दिया अवसर
JUP के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार हुमायूं कबीर ने गठबंधन में शामिल होने के लिए 15 फरवरी तक का समय रखा है। उनका कहना है कि जो भी दल BJP और TMC दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहता है, वह इस मंच पर शामिल हो सकता है। साथ ही, 11 फरवरी को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का काम शुरू होगा, जहां लगभग 5000 लोग कुरान पाठ में भाग लेंगे। हुमायूं कबीर इसे अपनी राजनीतिक और सामाजिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं। वहीं, हुमायूं कबीर की बेलडांगा रैली ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीसरे मोर्चे की चर्चा को फिर से सक्रिय कर दिया है। अब 15 फरवरी तक होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी नजर बनाए हुए हैं।





