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Tuesday, March 3, 2026
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Explainer: बंगाल के 4 अधिकारियों को चुनाव आयोग ने हटाने कहा, ममता बनर्जी ने किया इनकार

भारत के चुनाव आयोग ने मतदाता सूची बनाने में अनियमितताओं को लेकर बंगाल के चार अधिकारियों को हटाने को कहा है, जिससे ममता बनर्जी ने साफ़ इनकार कर दिया है, जानें क्या है पूरी खबर।

नई दिल्ली/रफ़्तार डेस्क। भारत के चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले मतदाता सूची बनाने में अनियमितताओं को लेकर बंगाल के 4 अधिकारियों को हटाने को कहा है, जिससे यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया है और साथ ही चुनाव आयोग को चुनौती भी दी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला!

बता दें, चुनाव से पहले मतदाता सूची बनाने में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए भारत के चुनाव आयोग ने बंगाल के चार अधिकारियों को हटाने को कहा है, जिस पर अब सीएम ममता बनर्जी ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया है और चुनाव आयोग को चुनौती दी है। ममता बनर्जी ने कहा, ऐसा कोई कानून नहीं है कि वह इन अधिकारियों को हटाने का आदेश दे सके। अब इसी मामले पर ममता से टकराव हो गया है।

आपको बता दें, चुनाव आयोग ने डेटा सुरक्षा उल्लंघन मामले में मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने और लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करने के आरोप में 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई में दो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, दो सहायक निर्वाचन अधिकारी और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल थे। कुछ जगहों पर हटाए जाने वाले लोगों की संख्या 4 बताई गई है।

भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गईं और उन्होंने साफ कहा कि वह किसी भी अधिकारी को नहीं हटाने वाली हैं और इसके साथ ही उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।

ममता बनर्जी ने इस बारे में पूछा, चुनाव लंबे समय बाद है, कौन सा कानून इस तरह की कार्रवाई की इजाजत देता है, इसके साथ ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को भाजपा का बंधुआ मजदूर बताते हुए इसे भाजपा के पक्ष में कदम बताया है। इस कार्रवाई को उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे कदमों से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी लागू करने की एक छिपी साजिश बताया है। कहा कि वह राज्य के अधिकारियों की रक्षा करेंगी और एफआईआर नहीं होने देंगी।

प्रश्न – क्या चुनाव आयोग राज्य सरकार के कर्मचारियों को हटा सकता है?

तो इसका उत्तर है हाँ, चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का अधिकार है। अगर चुनाव अधिकारी गलत तरीके से काम करते हैं और मतदाता सूची ठीक से तैयार नहीं करते हैं या डेटा सुरक्षा नीति का उल्लंघन करते हैं, तो भारत निर्वाचन आयोग निलंबन, प्राथमिकी और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

प्रश्न – क्या चुनाव आयोग मतदान से पहले चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले भी ऐसा कर सकता है?

तो इसका उत्तर यह है कि भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए गड़बड़ी के जोखिम को देखते हुए पहले भी अन्य राज्यों में वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया या स्थानांतरित किया है। जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में डीजीपी राजीव कुमार का तबादला किया गया था।

प्रश्न – तो फिर ममता बनर्जी चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को क्यों चुनौती दे रही हैं?

ममता बनर्जी चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को इसलिए चुनौती दे रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई का समय और इरादा संदिग्ध है। ममता का कहना है कि न तो चुनावों की घोषणा हुई है और न ही आदर्श आचार संहिता लागू है, फिर किस कानून के तहत चुनाव आयोग को राज्य के अधिकारियों को निलंबित करने या एफआईआर दर्ज करने का अधिकार है?

ममता का कहना है कि न तो चुनावों की घोषणा हुई है और न ही आदर्श आचार संहिता लागू है, फिर किस कानून के तहत चुनाव आयोग को राज्य के अधिकारियों को निलंबित करने या एफआईआर दर्ज करने का अधिकार है? इसीलिए उन्होंने पूछा, “चुनावों में अभी काफी समय है, फिर किस कानून के तहत आयोग ने यह कार्रवाई की है?” ममता बनर्जी ने तर्क दिया कि, राज्य सरकार के अधीन आने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है, चुनाव आयोग के पास नहीं।

प्रश्न – कौन सा कानून भारत के चुनाव आयोग को पूरे देश में चुनाव से जुड़े पहलुओं पर अधिकार देता है?

उत्तर यह है कि चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 और अनुच्छेद 324 का भी उल्लेख किया है, जो उसे पूरे देश में चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं को नियंत्रित करने की शक्ति देता है।

प्रश्न – चुनाव आयोग ने और किन राज्यों के खिलाफ कार्रवाई की है?

– चुनाव आयोग ने कई राज्यों में ऐसी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है, जहाँ पश्चिम बंगाल में साल 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले फरवरी-मार्च में राज्य के एडीजी और गृह सचिव को हटा दिया गया था। फिर चुनाव की घोषणा के बाद डीजीपी वीरेंद्र को भी हटा दिया गया। साल 2019 में, आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले मुख्य सचिव अनिल चंद्र पुनेठा को हटा दिया गया था। 

संविधान की गाइडलाइन 356 के अनुसार, यदि कोई राज्य संविधान के अनुसार काम नहीं कर रहा है, तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

– आप चुनाव आयोग के अध्यक्ष से शिकायत कर सकते हैं कि राज्य सरकार चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। ऐसी स्थिति में, राष्ट्रपति, राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को तीन बार रिपोर्ट दी जा सकती है। संविधान की गाइडलाइन 356 के अनुसार, यदि कोई राज्य संविधान के अनुसार काम नहीं कर रहा है, तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। हालाँकि, चुनाव आयोग में यह बहुत ही खराब स्थिति है, अन्यथा अन्य विकल्पों को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रश्न- क्या चुनाव आयोग इन उम्मीदवारों को सीधे उनके काम से हटा सकता है?

हाँ, चुनाव आयोग को यह कहने का अधिकार है कि अब इस अधिकारी को चुनाव से संबंधित कोई भी काम नहीं दिया जाएगा। यदि राज्य मदद नहीं करता है, तो चुनाव आयोग भारत सरकार (केंद्र) से मदद मांग सकता है। और सार्वजनिक रूप से राज्य सरकार को उल्लंघनकर्ता घोषित कर सकता है।

प्रश्न: 1993 में, सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई की थी।

1993 में, सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे ही एक मामले में अपना निर्णय दिया था। चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को नियुक्ति और नामांकन दाखिल करने सहित पूरी प्रक्रिया का संचालन और नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है।

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