कोलकाता, 15 जून (हि. स.)। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल को कोरोना से मृत व्यक्ति के शव का पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी करने की अनुमति दे दी है। इससे पहले कोलकाता के ही आर जी कर अस्पताल में कोरोना से मारे गये सामाजिक कार्यकर्ता एवं अंगदान आंदोलन के अग्रणी ब्रज राय के शव का पैथोलोजिकल अटाप्सी किया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार से ही ऑटोप्सी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। उल्लेखनीयहै कि पैथोलोजिकल ऑटोप्सी की पहल राज्य के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों की ओर से की गई है। इसके लिए स्वास्थ्य भवन ने एक आदर्श रूपरेखा भी बनाई है। मंगलवार को राज्य में कोरोना से मृत जिस व्यक्ति का पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी होने वाला है उनका नाम देबाशीष मुखर्जी है। वह हल्दिया में एक पेट्रोकेमिकल कंपनी के कर्मचारी है। 12 मई को उनमें कोरोना के हल्के लक्षण दिखाई दिए। अगले दिन 13 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं, उनकी पत्नी और छोटा बेटा भी कोरोना से संक्रमित थे। परिवार ने उन्हें 14 मई को हल्दिया के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जब उनका ऑक्सीजन स्तर कम होने लगा और उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। देबाशीष का सोमवार सुबह निधन हो गया। देबाशीष ने कहा था कि दुर्घटना में अगर उनकी मृत्यु हो जाती है तो वह अंगदान करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए देबाशीष की पत्नी ने अंगदान करने का फैसला किया। हालांकि, अगर कोरोना की वजह से मौत होती है तो अंगदान संभव नहीं है। इसलिए उनके पति के बचने की उम्मीद जब ना के बराबर हो गयी तो उन्होंने ‘गणदर्पण’ से संपर्क किया। वहां उन्होंने अंगदान की जानकारी दी। और इसलिए देबाशीष की मृत्यु के दिन स्वास्थ्य विभाग ने उनके शव की पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी की अनुमति दी। उल्लेखनीय है कि पैथोलोजिकल ऑटोप्सी के तहत मृत व्यक्ति के अंगों की स्थिति का परीक्षण कर रोग के कारणों एवं दुष्प्रभावों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुगंधी/मधुप





