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Tuesday, March 3, 2026
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धराली में तबाही मचाने वाली ‘खीरगंगा नदी’ का क्‍या है इतिहास, क्‍यों पड़ा ये नाम ? जानिए इसके पीछे की कहानी

उत्तरकाशी के धराली गांव में तबाही मचाने वाली नदी को खीरगंगा नदी कहा जाता है। खीरगंगा नदी ने समय-समय पर अपना रौद्र रूप दिखाकर व्यापक तबाही मचाई है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को अचानक आए बादल फटने के सैलाब ने भारी नुकसान किया। इस आपदा का कारण बनी खीरगंगा नदी ने रौद्र रूप धारण कर गांव को मलबे में बदल दिया। कुछ ही पलों में नदी ने रास्ते में आए घरों, होटलों और होमस्टे को बहा लिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नदी का नाम ‘खीरगंगा’ क्यों रखा गया है और इसकी उत्पत्ति कहां से होती है? आइए, इस रहस्य की पड़ताल करते हैं।

खीरगंगा नदी का उद्गम और उसका नामकरण

खीरगंगा नदी, भागीरथी नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जो उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बहती है। यह नदी श्रीकंठ पर्वत के शिखर से निकलती है और अपनी विनाशकारी बाढ़ के लिए पहचानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, खीरगंगा का पानी इतना साफ और शुद्ध होता है कि इसका रंग दूध या खीर जैसा प्रतीत होता है। इसी विशेषता के कारण इसे ‘खीरगंगा’ नाम दिया गया है।

पौराणिक मान्यता और खीरगंगा नदी का महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं में खीरगंगा नदी का खास स्थान है। कहा जाता है कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने इस नदी के किनारे तपस्या की थी। तब माता पार्वती ने कार्तिकेय के लिए दूध की एक धारा बहाई थी, जो खीर जैसी प्रतीत होती थी। बाद में उस धारा को पानी में बदल दिया गया, ताकि उसका दुरुपयोग न हो। आज भी खीरगंगा के पास गर्म पानी के कुंड मौजूद हैं, जिन्हें पवित्र माना जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस नदी में स्नान करने से कई बीमारियों से राहत मिलती है।

खीरगंगा नदी के विनाशकारी प्रकोप

खीरगंगा नदी ने समय-समय पर अपना रौद्र रूप दिखाकर व्यापक तबाही मचाई है। 19वीं सदी में इस नदी की भीषण बाढ़ ने लगभग 206 मंदिरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। हाल के वर्षों में भी खीरगंगा ने अपना प्रकोप दिखाया है। 2013 और 2018 में आई बाढ़ ने इलाके को भारी क्षति पहुंचाई। इस नदी की अप्रत्याशित उफान से स्थानीय जनजीवन प्रभावित हुआ है।

धराली में खीरगंगा की तबाही से फैला डर

इस वर्ष खीरगंगा नदी ने फिर से अपना रौद्र रूप दिखाया और पूरी तरह धराली गांव को अपनी चपेट में ले लिया। इस विनाशकारी बाढ़ ने लोगों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। इस आपदा में 5 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 100 लोग अभी भी लापता हैं। धराली में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन मिलकर प्रभावित लोगों की मदद में जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए प्रभावितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

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