-महिला प्रेरक सहित कार्यरत कर्मचारियों का बढ़ा मानदेय देहरादून, 15 (हि.स.)। जलागम एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को उत्तराखंड के दो प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान कार्बेट और राजा के समीपवर्ती चयनित राजस्व ग्रामों के समग्र विकास के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये की जैफ-6 परियोजना और इंसेप्शन कार्यशाला का शुभारंभ किया। इंदिरा नगर स्थित जलागम प्रबंधन निदेशालय के सभागार में बतौर मुख्य अतिथि मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि समीपवर्ती गांवों के लिए यह योजना समग्र विकास के लक्ष्य को लेकर नियोजित की गई है। परियोजना के माध्यम से चयनित राजस्व ग्रामों में जल संरक्षण संवर्धन और कृषि जैव विविधता संबंधी कार्यों के अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन संबंधी गतिविधियां की जाएगी। इससे ग्रामवासियों को लाभ मिल सकेगा। वर्चुअल कार्यशाला में महाराज ने कहा कि जैफ-6 परियोजना में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी काम होगा। साथ ही संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के समीप होने के कारण परियोजना के गांवों में इको टूरिज्म की संभावनाएं भी अवश्य होगी। परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में इको टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशने के लिए अध्ययन किया जाएगा। इको टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार की दिशा में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत चयनित राजस्व ग्रामों में जलवायु परिवर्तन, न्यूनीकरण, कृषि क्षेत्र सुधार जैव विविधता संरक्षण, मानव वन्यजीव संघर्ष रोकथाम, समन्वय गतिविधियां, समुदाय विकास तथा संवर्धन मूल्य विकास के साथ साथ सतत भूमि एवं वन प्रबंधन गतिविधियां की जाएगी। कोरोना महामारी के कारण परियोजना प्रारंभ होने में लगभग 1 वर्ष से अधिक का विलंब हुआ है, लेकिन अब 7 वर्षीय यह परियोजना 31 मार्च 2026 तक पूर्ण हो सकेगी। जलागम मंत्री ने बताया कि जलागम विभाग के अंतर्गत कार्यरत महिला प्रेरक जिन्हें पूर्व में 2 हजार की धनराशि मिलती थी उसे बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है जबकि लेखा सहायक को 4000 से बढ़ाकर 4500 रुपये, प्रोजेक्ट एसोसिएट को 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये, एमआईएस एक्सपर्ट को 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये मिलेंगे। कार्यशाला की अध्यक्षता मनीषा पंवार एसीएस, चेयरपर्सन, एसपीएससी ने की। उन्होंने बताया कि जलागम प्रबंधन निदेशालय द्वारा पूर्व की भांति इस परियोजना को भी जलागम की धारणा के अनुरूप ही संचालित किया जाएगा। उन्होंने जैफ के भारतीय प्रतिनिधि रोमियो सैकिरी का आभार जताते हुए बताया कि उनके प्रयासों से ही इस परियोजना के लिए उत्तराखंड राज्य का चयन किया गया है। जैफ-एफएओ के उप भारतीय प्रतिनिधि कोडा रेड्डी ने बताया कि यह परियोजना भारत के 5 राज्यों में संचालित हो रही है। परियोजना निदेशक नीना ग्रेवाल ने परियोजना की कार्ययोजना के बारे में बताया कि पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए जैविक खेती द्वारा पारंपरिक फसलों की उत्पादकता को कैसे बढ़ाया जाए। ऐसे नवाचार एवं अध्ययन परियोजना के द्वारा किए जाएंगे। राज्य समन्वयक विशेषज्ञ डा.जे.सी. पाण्डेय ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में जलागम प्रबंधन निदेशालय के उप परियोजना निदेशक, डा.डीएस रावत, डा. एस.के.सिंह, डा. आर.पी. सिंह, डा.आर.सी.तिवारी, डा.विकास वत्स जैव विविधता विशेषज्ञ, सनातन अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एस.एल.एन.ए.बी.पी.मुख्य वित्त अधिकारी, जलागम प्रबंधन निदेशालय, प्रमेश खंडूरी जी.आई. एस. विशेषण ने प्रतिभाग किया। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश




