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मलारी हाईवे रैणी के पास क्षतिग्रस्त, भवनों में दरार

गोपेश्वर, 14 जून (हि.स.)। चमोली जिले के जोशीमठ विकास खंड के रैंणी गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इन दिनों हो रही बारिश से ऋषिगंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। नदी के कटाव से मलारी हाईवे का 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। रैंणी गांव के आवासीय भवन खतरे की जद में आ गये हैं। सड़क बाधित होने से घाटी के 13 गांवों की आवाजाही बाधित हो गई है। आवासीय भवनों में पड़ रही दरारों और नदी से हो रहे कटाव से रैंणी के ग्रामीणों में दहशत है। बीती सात फरवरी को तपोवन-रैंणी क्षेत्र में बहने वाली ऋषिगंगा नदी के उद्गम क्षेत्र में हिमस्खलन से आई जल प्रलय से रैंणी से तपोवन तक खासी तबाही मची थी। इसके बाद यहां रैंणी में बीआरओ की ओर से वैली ब्रिज का निर्माण कर नीति घाटी में वाहनों की आवाजाही सुचारु करवाई गई। वहीं लोनिवि की ओर से भी यहां पैदल रास्तों और पुलों का निर्माण किया। लेकिन आपदा के दौरान रैंणी से तपोवन तक ऋषिगंगा नदी तटों में मलबे को जस का तस छोड़ दिया गया था। अब बारिश से ऋषिगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर मलबे के बहने के साथ ही यहां पहाड़ी का कटाव शुरू हो गया है। इससे हाईवे का 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय निवासी पुष्कर सिंह और देवेंद्र का कहना है कि आपदा के बाद प्रशासन की ओर से सड़क को दुरुस्त कर वाहनों की आवाजाही सुचारु करने के बाद यहां गांव के आसपास खुर्दबुर्द हुई पहाड़ियों को लेकर सुरक्षात्मक कार्य नहीं किये गये हैं। नदी के कटाव से गांव के 50 फीसदी आवासीय भवन भू-स्खलन की जद में हैं। यदि बरसात से पूर्व पुख्ता इंतजाम नहीं किये जाते तो यहां बड़ी दुर्घटना हो सकती है। जोशीमठ के तहसीलदार चंद्रेशेखर वशिष्ठ का कहना है कि रैंणी गांव में नदी के कटाव से उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। यहां खतरे की जद में आये भवनों को चिह्नित कर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश

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