नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार को तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जगलों में लगी आग को लेकर बुधवार को सुनवाई करी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने फंड और वन विभाग के अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाए जाने पर सवाल उठाए। कोर्ट का कहना है कि उत्तराखंड को उसके जगलों के मुताबिक फंड क्यों नहीं दिया जा रहा है। साथ ही राज्य सरकार से भी उपलब्ध कराए गए फंड के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए। कोर्ट का कहना है कि इतने लंबे समय से जंगलों में आग लगने की शिकायत है तब केंद्र ने वन अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी पर क्यों लगाया। कोर्ट ने पूछा जिस समय अधिकारियों की जरूरत वन में ज्यादा है तब उन्हें चुनावी ड्यूटी पर भेजना कहां तक जायज है।
कोर्ट ने किए केंद्र से तीखे सवाल
उत्तराखंड में नवंबर 2023 से सैकड़ों सक्रिय जंगल की आग से जूझ रहा है, जिससे लगभग 1,145 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट मई की शुरुआत से उत्तराखंड में जंगल की आग पर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। याचिकाओं के मुताबिक राज्य में कम से कम 910 घटनाएं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य पर भी केंद्र सरकार की आलोचना की कि उत्तराखंड को जंगल की आग से निपटने के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले केवल 3.15 करोड़ रुपये दिए गए थे।
वन अधिकारियों की नहीं लगेगी चुनावी ड्यूटी
कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि राज्य को जरूरत के मुताबिक फंड क्यों नहीं मुहैया करवाया गया। साथ ने कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि जब जंगलों में आग लगी हुई, उस समय वन अधिकारियों की सबसे ज्यादा जरूरत वन की आग बूझाने के लिए थी न कि चुनावी ड्यूटी। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से वन कर्मचारियों को आग के बीच चुनाव ड्यूटी पर लगाने के लिए सवाल पूछा। पिछली सुनवाई में, आलोचना झेल रहे राज्य ने कहा था कि मतदान केंद्रों पर तैनात वन अधिकारियों को उनके काम पर वापस बुला लिया गया है। राज्य के कानूनी प्रतिनिधि ने आज दोपहर में कहा कि मुख्य सचिव ने हमें निर्देश दिया है कि अब किसी भी वन अधिकारी को चुनाव ड्यूटी पर न लगाया जाए और हम अब आदेश वापस ले लेंगे।
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