नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत द्वारा सिख समुदाय के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद राजधानी देहरादून में शनिवार को विरोध की लहर उठ खड़ी हुई। आक्रोशित सिख समाज से जुड़े लोगों ने घंटाघर चौक पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए हरक सिंह रावत का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई। यह पूरा विवाद अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक चर्चा का केंद्र बन गया है।
विवाद की जड़: धरनास्थल पर हुई टिप्पणी
विवाद की शुरुआत शुक्रवार को तब हुई, जब हरक सिंह रावत हरिद्वार रोड स्थित धरनास्थल पर वकीलों की चल रही हड़ताल का समर्थन करने पहुंचे थे। इस दौरान, जब एक सिख वकील खड़े थे, तो हरक सिंह रावत ने कथित तौर पर उन्हें बैठने के लिए कहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उपस्थिति कुछ लोगों ने हरक सिंह रावत की इस टिप्पणी को सिख समुदाय के प्रति आपत्तिजनक माना, जिसके बाद माहौल तुरंत गरमा गया। धरनास्थल पर तत्काल हंगामा शुरू हो गया और प्रदर्शनकारी वकील और अन्य लोग हरक सिंह रावत का विरोध करने लगे। बढ़ते विवाद को देखते हुए, पूर्व मंत्री को आनन-फानन में माफ़ी मांगनी पड़ी और वह तुरंत धरनास्थल छोड़कर रवाना हो गए।
हरक सिंह रावत ने मांगी माफ़ी और दी सफाई
मामले को शांत करने की कोशिश में, शुक्रवार शाम को हरक सिंह रावत जिला अदालत परिसर स्थित बार एसोसिएशन कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने वकीलों के सामने अपना पक्ष रखा और पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी। हरक सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि, उनकी किसी भी टिप्पणी का मकसद किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं था। संबंधित सिख वकील से उनके व्यक्तिगत संबंध पहले से ही अच्छे हैं। उनके बयान का गलत अर्थ निकाल लिया गया।उन्होंने कई बार दोहराया कि यदि किसी को उनकी बात से ठेस पहुँची है तो वह इसके लिए दिल से क्षमा चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी का आशय न तो किसी का अपमान करना था और न ही किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना। उन्होंने सिख समुदाय के शौर्य और बलिदान के इतिहास को देश के लिए प्रेरणा बताते हुए, उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।
सिख समाज ने ठुकराई निजी माफ़ी, की सार्वजनिक क्षमा की मांग
हरक सिंह रावत के स्पष्टीकरण और निजी माफ़ी के बावजूद, सिख समाज के लोगों ने इसे पर्याप्त नहीं माना। शनिवार को घंटाघर चौक पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सार्वजनिक मंच पर की गई ऐसी टिप्पणी किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है और निजी स्पष्टीकरण काफी नहीं है। उन्होंने जोरदार मांग की है कि हरक सिंह रावत इस संवेदनशील मामले में स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से सिख समाज से माफ़ी मांगें।
इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है, और यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है। सिख समाज अपनी मांग पर अडिग है, जिससे यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है।





