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महिला अधिकारों की प्रहरी अमिता सुयाल का निधन

पौड़ी, 25 अप्रैल (हि.स.) । ग्रामीण महिलाओं के उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने व जागरुकता फैलाने वाली महिला अधिकारों की पोषक अमिता सुयाल का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे आजीवन गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारियों के प्रति जागरूक करती रहीं। वह शराब और जुआं के खिलाफ आंदोलन की अगुवा भी रहीं। वे अपने पीछे एक बेटा व दो बेटियों का हरा-भरा परिवार छोड़ गई हैं। वह तहसील व विकास खंड मुख्यालय थलीसैण की निवासी थीं। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। अमिता का अंतिम संस्कार घटबगड़ घाट पर किया गया। उन्हें बेटे पृथ्वीधर सुयाल ने मुखाग्नि दी। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व सामाजिक कार्यकर्ता शंभू प्रसाद मंमगाई ने बताया कि अमिता सुयाल बीरोंखाल के जिवाई गांव की रहने वाली हैं। उनका विवाह 60 वर्ष पहले कमडई गांव निवासी व जीआईसी बीरोंखाल संस्कृत प्रवक्ता के पद पर सेवारत दाताराम सुयाल से हुआ था। अमिता ग्राम विकास अधिकारी के पद पर सेवारत थीं। शादी के बाद उन्हें परिवार ने नौकरी करने की इजाजत नहीं दी। नौकरी छूटने के बाद अमिता ने समाज को जागरूक बनाने के लिए आंदोलन छेड़ा। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद अमिता सपरिवार करीब 26 वर्ष पहले थलीसैण आकर बस गईं। यहां उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। कैन्यूर, मुसेटी, कफल्ड, कपरोली, ऐठी, बग्वाड़ी, रोली, जखोला, पोखरी सहित क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों में अभियान चलाया। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मंमगाई ने बताया कि वर्ष 1995-96 में अमिता ने क्षेत्र के गांवों में महिलाओं को एकत्रित कर 15 से अधिक महिला मंगल दलों का गठन किया। ये महिलाएं लगातार क्षेत्र में बढ़ रहे शराब व जुआं के प्रचलन के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन करने लगीं। क्षेत्र की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। लॉकडाउन जैसी स्थिति में ग्रामीण महिलाएं स्वयं के संसाधनों को मजबूत कर परिवार की आजीविका में अहम योगदान दे रही हैं। अमिता को क्षेत्र में सामाजिक चेतना के लिए हमेशा याद किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार /राज

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