Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में ASI की सीलबंद सर्वे रिपोर्ट पेश, 21 दिसंबर को आएगा फैसला

Gyanvapi ASI Survey: वाराणसी के लंबे समय से लंबित मामले में आज वाराणसी की जिला अदालत में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने ज्ञानवापी मामले की अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश कर दी है।
Gyanvapi ASI Survey
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। Gyanvapi ASI Survey: वाराणसी के लंबे समय से लंबित मामले में आज वाराणसी की जिला अदालत में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने ज्ञानवापी मामले की अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश कर दी है। ASI के एडिशनल डायरेक्टर ने वाराणसी के जिला जज को सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की है। ये रिपोर्ट 1500 से ज्यादा पेज की बताई जा रहीं है। जिसमें 250 से ज़्यादा के साक्ष्य पेश किए गए हैं। अपको बता दें इससे पहले मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में याचिका देते हुए मांग की थी कि रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में ही पेश किया जाए।

मुस्लिम पक्ष का रिपोर्ट पब्लिक डोमेन लाने से इनकार

ASI ने आज वाराणसी जिला जज एके विश्वेश के समने इस रिपोर्ट को पेश किया है। जहां एक तरफ मुस्लिम पक्ष का कहना था कि रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में ही पेश हो। तो वहीं हिंदू पक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। जिस पर मुस्लिम पक्ष कह रहा है कि इसे पब्लिक डोमेन में न लाया जाए। इस पर अब 21 दिसंबर को फैसला आएगा। सर्वे रिपोर्ट की कॉपी 21 दिसंबर को ही पक्षकारों को दी जाएगी।

हिंदू पक्ष ने रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की

हिंदू पक्ष ने इसमें शामिल सभी पक्षों को रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए निर्देश देने की मांग की। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष ने यह भी मांग की थी कि बिना हलफनामे के किसी को भी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की इजाजत ना दी जाए। दोपहर में ही जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट पेश होते समय कोर्ट में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन सहित सभी पक्ष मौजूद थे, इसमें शृंगार गौरी की वादिनी महिलाएं भी शामिल थीं।

एएसआई ने इस रिपोर्ट को पेश करने से पहले कोर्ट से मांगा था समय

अपको बता दें कि 30 नवंबर को वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद की ASI सर्वे की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 3 हफ्तों का समय मांगा था। इस पर जिला जज ने ASI को 10 दिनों का वक्त दिया था। इसके बाद ASI ने दोबारा समय की मांग की थी। एएसआई ने इस रिपोर्ट को पेश करने से पहले दो-तीन बार रिपोर्ट जमा करने के लिए कोर्ट से और समय मांगा था। जिसके बाद अब जाकर एएसआई ने सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

वाराणसी जिला न्यायालय ने दिया था ASI को सर्वेक्षण का आदेश

गौरतलब है कि वाराणसी जिला न्यायालय ने 21 जुलाई को एएसआई को ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य यह था कि निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था या नहीं। बता दें कि कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद में करीब 100 दिनों तक सर्वे कराया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के लोगों के साथ ASI के साइंटिस्ट और स्थानीय प्रशासन के लोग शामिल रहे। सर्वे की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कोर्ट में सर्वे की रिपोर्ट जमा हो जाने के बाद यह पता चल सकेगा कि ज्ञानवापी परिसर में आखिर है क्या?

क्या है विवाद?

आपको बता दें काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद काफी हद तक अयोध्या विवाद जैसा ही है। हालांकि, अयोध्या के मामले में मस्जिद बनी थी और इस मामले में मंदिर-मस्जिद दोनों ही बने हुए हैं। काशी विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई थी। हिंदू पक्ष के दावे के मुताबिक, 1670 से वह इसे लेकर लड़ाई लड़ रहा है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मंदिर नहीं था और शुरुआत से ही मस्जिद बनी थी। ज्ञानवापी परिसर का ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 'वजुखाना' क्षेत्र को छोड़कर वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण करने से रोकने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया था।

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